Monday, 31 Aug 2026 भारत
ब्रेकिंग
Timber Smuggling: दसपुर में USTR की बड़ी कार्रवाई, 3 घन मीटर लकड़ी बरामद, पुरानी जब्ती से जुड़े तार Balrampur news: मजदूरों से भरी बस और बोलेरो की टक्कर, एक की मौत, कई घायल Balrampur Crime News: मुर्गा बनाने को लेकर विवाद, पति ने पत्नी को डंडे से पीटकर उतारा मौत के घाट Kaushambi firecracker factory blast, 8 की मौत, 20 की हालत नाजुक, मलबे से निकाले गए 22 लोग Ambikapur Road Accident: ट्रक की टक्कर से आरक्षक की मौत, ड्यूटी के बीच हादसे ने छीनी जिंदगी Crime news Janjgir-Champa: जमीन विवाद में भाभी की हत्या, पति गंभीर, आरोपी भाई गिरफ्तार Timber Smuggling: दसपुर में USTR की बड़ी कार्रवाई, 3 घन मीटर लकड़ी बरामद, पुरानी जब्ती से जुड़े तार Balrampur news: मजदूरों से भरी बस और बोलेरो की टक्कर, एक की मौत, कई घायल Balrampur Crime News: मुर्गा बनाने को लेकर विवाद, पति ने पत्नी को डंडे से पीटकर उतारा मौत के घाट Kaushambi firecracker factory blast, 8 की मौत, 20 की हालत नाजुक, मलबे से निकाले गए 22 लोग Ambikapur Road Accident: ट्रक की टक्कर से आरक्षक की मौत, ड्यूटी के बीच हादसे ने छीनी जिंदगी Crime news Janjgir-Champa: जमीन विवाद में भाभी की हत्या, पति गंभीर, आरोपी भाई गिरफ्तार
W 𝕏 f
होम राज्य सरकार scientific fish farming: कामिनी रोहतिया ने वैज्ञा…
Kamini Rohatia Scientific Fish Farming
Kamini Rohatia Scientific Fish Farming
राज्य सरकार

scientific fish farming: कामिनी रोहतिया ने वैज्ञानिक मत्स्य पालन से बढ़ाई आमदनी, बनीं किसानों की मिसाल

scientific fish farming: खोंगापानी की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया ने वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के सहयोग से करीब एक हेक्टेयर तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन शुरू किया। करीब 5 हजार फिंगरलिंग्स के संचयन, बेहतर तालाब प्रबंधन और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें अब सालाना लगभग 2 लाख रुपए का लाभ मिल रहा है। उनका अनुभव दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है।

कीर्तिमान डेस्क | धनेश्वरी साहू
31 Aug 2026, 03:47 PM
रायपुर
scientific fish farming: मेहनत, सही तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन का साथ मिले तो सीमित संसाधनों से भी बेहतर आमदनी का रास्ता तैयार किया जा सकता है। इसकी प्रेरक मिसाल हैं खोंगापानी, विकासखंड मनेन्द्रगढ़ की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया, जिन्होंने वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के सहयोग से अपने लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल के तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन शुरू किया। आज यही तालाब उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया है और वे प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख रुपए का लाभ प्राप्त कर रही हैं। मत्स्य पालन शुरू करने से पहले कामिनी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थीं। 
कृषि कार्य में मेहनत अधिक होने के बावजूद अपेक्षाकृत कम आय प्राप्त होती थी। वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग की नवीन तालाब निर्माण योजना के अंतर्गत उन्हें लगभग 1 हेक्टेयर तालाब निर्माण का लाभ मिला। इसके बाद उन्होंने तालाब का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया। विभाग द्वारा उन्हें मत्स्य पालन की वैज्ञानिक तकनीक, तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल के संबंध में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। विभागीय मार्गदर्शन के अनुसार उन्होंने तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प (IMC) प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया। तालाब में लगभग 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया गया।

तालाब बना कमाई का जरिया, कामिनी रोहतिया ने मत्स्य पालन से बदली आर्थिक स्थिति
वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ा उत्पादन

कामिनी तालाब में मछलियों के उचित प्रबंधन, पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और समय-समय पर आवश्यक देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। मत्स्य विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह के अनुसार वे तालाब प्रबंधन करती हैं। मछलियों में होने वाली संभावित बीमारियों की पहचान एवं रोकथाम के संबंध में भी उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। नियमित देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का परिणाम उनकी आय में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वर्तमान में लगभग 1 हेक्टेयर तालाब से मत्स्य पालन के माध्यम से उन्हें करीब 2 लाख रुपए का वार्षिक लाभ प्राप्त हो रहा है। मत्स्य पालन ने न केवल उनकी आय को बढ़ाया, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया है।

विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

कामिनी का कहना है कि मत्स्य विभाग द्वारा समय-समय पर दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में काफी सहायता मिली। उनका अनुभव है कि यदि तालाब का सही प्रबंधन करते हुए वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन किया जाए तो सीमित संसाधनों में भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। वर्ष 2022 से मत्स्य पालन करते हुए उन्होंने तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। अब उनका लक्ष्य मत्स्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, बेहतर तालाब प्रबंधन और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से वे भविष्य में अपने व्यवसाय को और विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं।

अन्य किसानों के लिए प्रेरक संदेश

कामिनी अन्य किसानों को संदेश देते हुए कहती हैं कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन को आय का लाभदायक साधन बनाया जा सकता है। उनका सफल अनुभव बताता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर, विशेषज्ञों की सलाह अपनाकर और नियमित मेहनत के साथ मत्स्य पालन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। कामिनी की सफलता आज यह संदेश देती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर मेहनत से एक साधारण तालाब भी आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है।
क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
देश
विदेश
सरकारी सूचना
राजनीति
खेल
मनोरंजन
कारोबार
कीर्तिमान विशेष
तकनीक शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
अभी कोई रील उपलब्ध नहीं है
टिप्पणियाँ
शेयर करें
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें