हुजूर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नांदनी में विकास कार्यों के दावों की उस समय पोल खुलती नजर आई, जब रविवार को एक महिला की अंतिम यात्रा बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच निकाली गई। गांव में मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को घुटनों तक भरे कीचड़ और दलदली रास्ते से होकर गुजरना पड़ा। मजबूरी में लोगों ने महिला के शव को कंधों पर उठाया और बारिश से खराब हो चुके रास्ते को पार करते हुए अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम तक पहुंचे। इस घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर ग्रामीण
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत नांदनी निवासी घनश्याम महेश्वरी की पत्नी कुंता बाई महेश्वरी का निधन हो गया था। रविवार दोपहर करीब 12 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, लेकिन गांव से मुक्तिधाम तक जाने वाला मार्ग बारिश के कारण पूरी तरह खराब हो चुका था। रास्ते में जगह-जगह पानी भरा हुआ था और मिट्टी दलदल में बदल गई थी। ऐसे हालात में ग्रामीणों ने किसी तरह शव को कंधों पर उठाया और काफी मशक्कत के बाद अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या पहली बार नहीं आई है, बल्कि हर बारिश के मौसम में उन्हें इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वर्षों से सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम तक सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन पंचायत और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल से मुक्तिधाम तक जाने वाला रास्ता बारिश के दिनों में पूरी तरह अनुपयोगी हो जाता है। अंतिम यात्रा जैसे संवेदनशील समय में भी लोगों को कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जो ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति है। कई बार सरपंच, पंचायत सचिव और अन्य अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।मौके पर पहुंची सरपंच
ग्रामीणों के मुताबिक अंतिम यात्रा के दौरान सरपंच कृपामणि राजेश वर्मा को मौके पर बुलाया गया था। बताया गया कि उन्होंने रास्ते की खराब स्थिति को देखा, लेकिन इसके बाद भी सड़क निर्माण को लेकर कोई तत्काल पहल नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम तक पहुंचने का रास्ता केवल आवागमन की सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि यह गांव के लोगों के सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय है। ऐसे में इस समस्या का जल्द समाधान होना जरूरी है।
कब्जे के कारण बढ़ी परेशानी
मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए एक अन्य रास्ता भी मौजूद है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उस मार्ग पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। इसके कारण मजबूरी में ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। सरपंच प्रतिनिधि राजेश वर्मा ने बताया कि रास्ते की समस्या को लेकर एसडीएम को पत्र दिया गया है। इसमें रास्ते का सीमांकन कर निर्माण कार्य के लिए राशि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव हो पाएगा।