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लावारिस मिला नवजात बच्चा, पुलिस ने बचाया
लावारिस मिला नवजात बच्चा, पुलिस ने बचाया
राष्ट्रीय

शर्मसार : मंदसौर में इंसानियत की जीत, लावारिस मिले 5 दिन के नवजात को मिला नया सहारा

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा क्षेत्र में 5 दिन का नवजात बच्चा लावारिस हालत में मिला। रोते हुए मासूम की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने उसे संभाला और पुलिस को सूचना दी। भानपुरा पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्चे को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया। इसके बाद नवजात को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया। ग्रामीणों और पुलिस की संवेदनशीलता से मासूम की जान बच गई।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 23 Jul 2026, 03:21 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 01:44 PM
मध्य प्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

कहते हैं कि ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोई’… यह कहावत मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में उस वक्त सच साबित हुई, जब एक 5 दिन के मासूम नवजात की जिंदगी पर बड़ा संकट आ खड़ा हुआ। भानपुरा क्षेत्र के लोधखेड़ी गांव के पास एक नवजात बच्चा लावारिस हालत में मिला। जन्म देने वाले ने भले ही इस मासूम का साथ छोड़ दिया, लेकिन ग्रामीणों की इंसानियत और पुलिस की संवेदनशीलता ने उसे नया जीवन दे दिया।मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र के लोधखेड़ी गांव के पास ग्रामीणों ने एक  नवजात बच्चे को अकेले पड़े देखा। बताया जा रहा है कि बच्चा महज 5 दिन का था और खुले स्थान पर असहाय हालत में पड़ा हुआ था। मासूम के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों का ध्यान उसकी ओर गया। बच्चे को इस हालत में देखकर ग्रामीणों का दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत उसे उठाया और सुरक्षित स्थान पर ले गए। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए बच्चे को संभाला, उसे कपड़े में लपेटा और उसकी हालत की जानकारी पुलिस को दी।

ममता हुई शर्मसार,

इस घटना ने जहां एक ओर मां की ममता को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की संवेदनशीलता ने मानवता की मिसाल पेश की। जिस मासूम को जन्म के कुछ ही दिनों बाद अकेला छोड़ दिया गया था, उसे ग्रामीणों ने अपने परिवार के सदस्य की तरह संभाला। ग्रामीणों की तत्परता के कारण समय रहते बच्चे को मदद मिल सकी। अगर ग्रामीणों की नजर उस मासूम पर नहीं पड़ती तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती थी।

मौके पर पहुंची भानपुरा पुलिस

नवजात के मिलने की सूचना मिलते ही भानपुरा थाना पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और बच्चे को अपनी सुरक्षा में लिया। पुलिसकर्मियों ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए मासूम को गोद में उठाया और उसे सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। पुलिसकर्मियों का यह मानवीय चेहरा देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने भी उनकी सराहना की। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नवजात की सुरक्षा और देखभाल को अपनी प्राथमिकता बनाया।

जांच में स्वस्थ मिला मासूम

पुलिस टीम बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। मेडिकल जांच में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि नवजात की हालत फिलहाल ठीक है और उसे किसी तरह की गंभीर परेशानी नहीं है। अस्पताल में बच्चे को जरूरी प्राथमिक उपचार और देखभाल दी गई। इसके बाद पुलिस ने आगे की प्रक्रिया पूरी करते हुए बच्चे को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया। अस्पताल से छुट्टी के बाद नवजात को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है। अब समिति की निगरानी में बच्चे की देखभाल और पालन-पोषण किया जाएगा। समिति आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चे के भविष्य को लेकर निर्णय लेगी।

पुलिस-ग्रामीण बने सहारा

भले ही जन्म देने वाले ने इस मासूम को बेसहारा छोड़ दिया, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता, पुलिस की संवेदनशीलता और डॉक्टरों की देखभाल ने साबित कर दिया कि समाज में आज भी इंसानियत जिंदा है। लोधखेड़ी गांव की यह घटना लोगों के लिए एक संदेश है कि थोड़ी सी जागरूकता और मदद की भावना किसी की जिंदगी बचा सकती है। इस मासूम को नया जीवन देने में ग्रामीणों और पुलिस की भूमिका किसी देवदूत से कम नहीं रही।

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