कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। कांग्रेस के संकटमोचक माने जाने वाले डी.के. शिवकुमार ने कर्नाटक के 34वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। बेंगलुरु के खचाखच भरे स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान शिवकुमार का अंदाज बेहद खास रहा; उन्होंने अपने हाथ में भारत के संविधान की प्रति (कॉपी) लेकर शपथ ली, जो सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
मंच पर विपक्षी एकजुटता और दिग्गजों का जमावड़ा
शपथ ग्रहण करने से ठीक पहले डी.के. शिवकुमार ने मंच पर मौजूद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का अभिवादन किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उनका आभार जताया। इस समारोह में विपक्ष के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसे एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया।
कैबिनेट का विस्तार: किसे क्या मिली जिम्मेदारी?
डीके शिवकुमार के साथ-साथ उनके नए मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस नई सरकार में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की गई है।
प्रमुख चेहरे और संभावित विभाग:
जी. परमेश्वर (डिप्टी सीएम): कांग्रेस के सीनियर नेता और दलित चेहरे जी. परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। वे सरकार में शिवकुमार के बाद दूसरे सबसे कद्दावर नेता होंगे।
प्रियांक खड़गे (कैबिनेट मंत्री): कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, उन्हें बेहद महत्वपूर्ण गृह विभाग (Home Ministry) सौंपा जा सकता है।
ताजा अपडेट और आगे की चुनौतियां
शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद नई कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस द्वारा चुनाव के दौरान दी गई '5 गारंटियों' (मुफ्त बिजली, महिलाओं को भत्ता, आदि) को लागू करने की है। इसके साथ ही, विभागों का बंटवारा पूरी तरह संतुलित रखना भी नए सीएम के लिए एक परीक्षा होगी।
बड़ी बात: डीके शिवकुमार का हाथ में संविधान लेकर शपथ लेना यह संदेश देता है कि नई सरकार पूरी तरह से संवैधानिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की रक्षा के वादे के साथ आगे बढ़ेगी।
कर्नाटक में इस नई शुरुआत के बाद अब पूरे देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिवकुमार कैबिनेट अपने पहले 100 दिनों में राज्य को क्या नई दिशा देती है।
