वैश्विक सप्लाई चेन पर चीन (China) के दादाशाही और एकाधिकार (Monopoly) को ध्वस्त करने के लिए भारत ने एक और बड़ा रणनीतिक दांव खेल दिया है। पिछले कुछ समय से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई को रोकने की चीनी चालबाजियों से परेशान दुनिया के लिए अब एक राहत भरी खबर है। दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के सबसे समृद्ध और भू-राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश चिली (Chile) ने भारत पर बड़ा भरोसा जताया है। यह साझेदारी न केवल चीन की निर्भरता को खत्म करेगी, बल्कि भारत की 'ग्रीन एनर्जी' और 'डिजिटल क्रांति' की रीढ़ साबित होगी।
भारत के लिए खुलेगा अवसरों का द्वार
भारत और चिली के बीच इस समय कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है।
ताज़ा अपडेट: दोनों देशों ने हाल ही में इसके 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
समय-सीमा: सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी साल की तीसरी या चौथी छमाही तक इस ऐतिहासिक समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है।
बड़ा फायदा: यह समझौता भारतीय दिग्गज कंपनियों को चिली में जाकर सीधे क्रिटिकल मिनरल्स के खनन (Mining) और प्रोसेसिंग का अभूतपूर्व अवसर देगा, जिससे भारत की लॉन्ग-टर्म सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगी।
क्रिटिकल मिनरल्स का वैश्विक पावरहाउस है चिली
चिली को यूं ही खनिजों का बादशाह नहीं कहा जाता। जब बात भविष्य की तकनीक, यानी सेमीकंडक्टर, ईवी (EV) बैटरी और सोलर पावर की आती है, तो चिली के बिना दुनिया अधूरी है:
1. तांबे (Copper) का साम्राज्य
चिली की धरती में दुनिया का 20% से अधिक ज्ञात तांबा मौजूद है।
यह दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक देश है, जो वैश्विक आपूर्ति में 24% से 28% तक की हिस्सेदारी रखता है।
महत्व: बिना तांबे के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), विंड टरबाइन, सोलर पैनल और आधुनिक इलेक्ट्रिक ग्रिड बनाना असंभव है।
2. लिथियम (सफेद सोना) का महाभंडार
चिली के पास दुनिया का सबसे विशाल लिथियम रिजर्व है, जिसे आज की दुनिया का 'सफेद सोना' (White Gold) कहा जाता है।
वैश्विक लिथियम भंडार का 30% से 40% हिस्सा अकेले चिली में है, और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लिथियम उत्पादक है।
अन्य खनिज: इसके अलावा यहाँ कोबाल्ट, मोलिब्डेनम और रेनियम (Rhenium) का भी विशाल भंडार है। रेनियम का इस्तेमाल जेट इंजन और हाई-टेंपरेचर सुपरअलॉय बनाने में होता है।
चीन के मुकाबले चिली भारत के लिए क्यों है 'परफेक्ट पार्टनर'?
वैश्विक समीकरणों को देखें तो चिली के साथ भारत की यह दोस्ती रणनीतिक रूप से मास्टरस्ट्रोक मानी जा रही है:
| विशेषता | भारत के लिए रणनीतिक लाभ |
| FTA गेटवे | चिली का प्रशांत क्षेत्र (Pacific Rim) के कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है। भारत के लिए यह पूरे लैटिन अमेरिका और पैसिफिक ब्लॉक में एंट्री का नया गेटवे बनेगा। |
| आर्थिक व राजनीतिक स्थिरता | लैटिन अमेरिकी देशों में अक्सर राजनीतिक उथल-पुथल रहती है, लेकिन चिली अपनी मजबूत राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए जाना जाता है। यहाँ की प्रति व्यक्ति आय भी क्षेत्र में सबसे बेहतर है। |
| मजबूत वित्तीय ढांचा | वैश्विक वित्तीय संरचना (Global Financial Architecture) में चिली की साख बेहद मजबूत और पारदर्शी है, जिससे भारतीय कंपनियों का निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। |
| लोकतांत्रिक भरोसा | चीन जैसे गैर-लोकतांत्रिक देशों पर निर्भर रहने का जोखिम दुनिया देख चुकी है, जहाँ नीतियां रातों-रात बदल जाती हैं। चिली एक स्थापित लोकतंत्र है, जो भारत के लिए एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक विकल्प है। |
