ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर हैं। कूटनीति पूरी तरह ठंडे बस्ते में है और संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर वैश्विक मंचों तक दोनों देशों के बीच तीखी जुबानी जंग जारी है। लेकिन इस कड़वाहट के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है।
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच तीन दौर की बैकचैनल (Track 2) बातचीत पूरी हो चुकी है। इस खुलासे के बाद पाकिस्तानी बुद्धिजीवियों और पूर्व राजनयिकों ने अपनी सरकार पर भारत के साथ रिश्ते सुधारने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
"IIT कैंपस बदला देगा पाकिस्तानी युवाओं की तकदीर"
कनाडा में रह रहे एक प्रमुख पाकिस्तानी प्रोफेसर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ शांति बनाए रखना इस वक्त पूरी तरह से पाकिस्तान के हित में है। उन्होंने एक अनोखा सुझाव देते हुए कहा:
"यदि भारत का एक 'IIT कैंपस' पाकिस्तान में खुल जाए, तो दिवालियापन की कगार पर खड़े पाकिस्तान के युवाओं की तकदीर बदल सकती है और देश में तकनीकी क्रांति आ सकती है।"
"एक और सैन्य संकट झेलने की औकात नहीं"
अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने प्रतिष्ठित 'डॉन' (Dawn) अखबार में एक विस्तृत लेख लिखकर अपनी ही सरकार को आईना दिखाया है। लोधी का मानना है कि दोनों देशों में से कोई भी पहला कदम नहीं उठाना चाहता, लेकिन पाकिस्तान के लिए यह चुप्पी आत्मघाती साबित हो रही है।
RSS के रुख और पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
लोधी ने अपने लेख में एक दिलचस्प मोड़ का जिक्र किया। भारत में आरएसएस (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के एक हालिया बयान के बाद दोनों देशों में वार्ता बहाल करने की अटकलें तेज हुईं। इस विचार का भारत के पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व रॉ (R&AW) चीफ ने भी समर्थन किया।
पाकिस्तान का रुख: पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे एक 'सकारात्मक घटनाक्रम' बताया है।
पेच कहाँ फंसा है?: मलीहा लोधी के अनुसार, दो दौर की अनौपचारिक बातचीत के बाद भी इस्लामाबाद को नई दिल्ली (भारत सरकार) की ओर से कोई आधिकारिक या ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है। भारत का रुख साफ है—"आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।"
जल युद्ध पानी की एक-एक बूंद को तरसेगा पाकिस्तान!
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार चलाया है—सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को रद्द करना। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में प्रण लिया है कि पाकिस्तान को उसके कर्मों की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और 'भारत की नदियों' से पानी की एक बूंद भी सीमा पार नहीं जाएगी।
| संकट का क्षेत्र | पाकिस्तान पर इसका प्रभाव |
| कृषि क्षेत्र (Agriculture) | पाकिस्तान का पूरा नहरी तंत्र सिंधु नदी पर निर्भर है। पानी रुकने से देश में अकाल जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। |
| वॉटर सिक्योरिटी | पीने के पानी का संकट गहराएगा, जिससे आंतरिक गृहयुद्ध भड़कने का खतरा है। |
SIPRI की रिपोर्ट और भारत का ₹7 लाख करोड़ ($85B) का रक्षा बजट
मलीहा लोधी ने पाकिस्तानी जनमानस को आगाह किया है कि भारत इस समय सैन्य रूप से अजेय बनता जा रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने कुछ बेहद डराने वाले आंकड़े साझा किए:
रक्षा बजट: भारत का रक्षा बजट इस साल रिकॉर्ड 85 अरब डॉलर (लगभग 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक) पहुंच गया है।
हवाई ताकत: भारत फ्रांस से 100 से ज्यादा नए राफेल जेट खरीद रहा है, जिससे पाक वायुसेना (PAF) पूरी तरह अप्रासंगिक हो जाएगी।
अभेद्य सुरक्षा: रूस का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और अत्याधुनिक प्रीडेटर ड्रोन भारत की सीमाओं को अभेद्य बना रहे हैं।
परमाणु अपग्रेड: भारत अब अपनी मिसाइलों पर लाइव परमाणु बम (Nuclear Warheads) तैनात कर रहा है।
पाकिस्तान के पास विकल्प क्या है?
पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ युद्ध का सोचना भी पाकिस्तान के लिए पूरी तरह तबाही को दावत देना होगा। आर्थिक कंगाली और भारत की सैन्य ताकत के आगे टिकने का एकमात्र रास्ता यही है कि पर्दे के पीछे की इस 'बैकचैनल बातचीत' को मुख्यधारा की बातचीत में बदला जाए। हालांकि, गेंद पूरी तरह से भारत के पाले में है, और नई दिल्ली बिना ठोस आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई के पाकिस्तान को कोई ढील देने के मूड में नहीं दिख रही है।
