महासमुंद जिले के बसना स्थित मंगल भवन में गुरुवार को दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस शिविर में बसना, पिथौरा और सरायपाली विकासखंड के चयनित दिव्यांग हितग्राहियों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में अधिक सुविधा उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह शिविर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) योजना के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), रायपुर के माध्यम से किया गया, जो वित्त मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन संस्था के सहयोग से संचालित है।
जनप्रतिनिधियों ने किया उपकरण वितरण
कार्यक्रम में बसना विधायक संपत अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ सरायपाली विधायक चातुरी डिग्रीलाल नंद, जनपद पंचायत बसना की अध्यक्ष डिलेश्वरी निराला और नगर पंचायत बसना की अध्यक्ष खुशबू अग्रवाल भी मौजूद रहीं। अतिथियों ने दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण सौंपते हुए उनके बेहतर स्वास्थ्य, सुगम जीवन और आत्मनिर्भर भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
44 दिव्यांगजनों को मिले 85 सहायक उपकरण
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर आयोजित इस शिविर में तीनों विकासखंडों के पहले से चिन्हित दिव्यांग हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इनमें पिथौरा के 7, बसना के 18 और सरायपाली के 19 सहित कुल 44 दिव्यांगजन शामिल रहे।

निःशुल्क सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें प्रमुख रूप से—
- 21 बैटरी चालित ट्रायसाइकिल
- 12 सामान्य ट्रायसाइकिल
- 8 व्हीलचेयर
- 6 श्रवण यंत्र
- 2 वॉकिंग स्टिक
- 2 सुगम्य केन
- 2 टीएलएम किट
- 2 रोलेटर (बैसाखी)
कई अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि रहे मौजूद
शिविर में समाज कल्याण विभाग की उप संचालक संगीता सिंह, जनपद पंचायत बसना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वप्निल ध्रुव, एलिम्को रायपुर के प्रबंधक बंशीलाल साकेत, कनिष्ठ प्रबंधक धर्मेंद्र यादव, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के रीजनल मैनेजर राजेश बाघमारे, प्रशासनिक प्रबंधक विनीत भाटी सहित समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों तक आवश्यक सहायक उपकरण पहुंचाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके जीवन को अधिक सुगम बनाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।