तकनीकी अड़चनों की मार : छत्तीसगढ़ में 3.40 लाख छात्रों की छात्रवृत्ति अटकी, दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर
छत्तीसगढ़ के सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 3.40 लाख से अधिक SC, ST और OBC विद्यार्थी शैक्षणिक सत्र 2025-26 की छात्रवृत्ति से अब भी वंचित हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 14.79 लाख पात्र छात्रों में से 11.38 लाख को भुगतान किया जा चुका है, जबकि करीब 23 प्रतिशत छात्रों की राशि अटकी हुई है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत की खबर अब भी अधूरी है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति (Scholarship) अब तक 3.40 लाख से अधिक आरक्षित वर्ग (SC, ST और OBC) के बच्चों तक नहीं पहुँच सकी है। विभागीय आंकड़ों से साफ हुआ है कि पोर्टल की तकनीकी कमियों, बैंक खातों में आधार लिंकिंग और राशन कार्ड में ई-केवाईसी (e-KYC) न होने के कारण पात्र होते हुए भी छात्रों के खातों में पैसे ट्रांसफर नहीं हो पा रहे हैं।
क्या कहते हैं आधिकारिक आंकड़े?
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को राज्य भर के जिलों से भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक:
कुल पात्र छात्र: 14,79,854
जिन्हें छात्रवृत्ति मिली: 11,38,873
जो अब भी वंचित हैं: 3,40,981
यानी कुल लक्ष्य का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा अब भी सरकारी मदद का इंतजार कर रहा है।
कहाँ आ रही है सबसे बड़ी अड़चन?
छात्रवृत्ति रुकने के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं:
बैंक और पोर्टल के बीच तालमेल की कमी: कई अभिभावकों ने बैंकों में जाकर अपने बच्चों के बैंक खाते में आधार लिंकिंग (Aadhaar Seeding) करवा ली है। लेकिन बैंक के सर्वर से यह जानकारी छात्रवृत्ति पोर्टल पर अपडेट ही नहीं हो रही। नतीजतन, सिस्टम छात्र को 'अपात्र' या 'पेंडिंग' दिखा देता है।
राशन कार्ड ई-केवाईसी का झंझट: राज्य की छात्रवृत्ति प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए राशन कार्ड के ई-केवाईसी को भी इससे जोड़ा गया है। अभिभावकों का कहना है कि वे दो-तीन महीने पहले ही केवाईसी करा चुके हैं, पर दफ्तरों के रिकॉर्ड में यह जानकारी दर्ज नहीं दिख रही।
इस तकनीकी पेंच के चलते दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को बैंक और शिक्षा विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
राज्य के कुछ प्रमुख जिलों में छात्रवृत्ति वितरण का दायरा और प्रतिशत इस प्रकार रहा है:
| जिला | अनुमानित छात्र संख्या | भुगतान पाए छात्र | वितरण प्रतिशत |
| दुर्ग | 56,513 | 44,438 | 78.63% |
| बलौदाबाजार | 92,929 | 69,976 | 75.30% |
| रायपुर | 85,220 | 63,976 | 75.07% |
| बस्तर | 47,483 | 33,508 | 70.57% |
| जांजगीर-चांपा | 55,994 | 38,839 | 69.36% |
| सुकमा | 15,337 | 10,492 | 68.41% |
| महासमुंद | 56,229 | 38,294 | 68.10% |
| कबीरधाम | 62,671 | 41,539 | 66.28% |
पोर्टल की कमियों को दूर करने की हो रही कोशिश
वहीं दूसरी ओर राजनांदगांव, सरगुजा, बालोद, मोहला-मानपुर, गरियाबंद, कोरिया, धमतरी और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में काम की गति अच्छी रही है। यहाँ लगभग 80 से 90 प्रतिशत विद्यार्थियों के खातों में राशि भेजी जा चुकी है। छत्तीसगढ़ शासन की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा तीसरी से लेकर 12वीं तक के छात्रों को उनकी कक्षा और वर्ग के अनुसार सालाना ₹300 से लेकर ₹2,500 तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि छोटे बच्चों की किताबों, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म के खर्चों में बड़ी मदद बनती है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के अधिकारियों का कहना है कि जिलों से आए आंकड़ों के आधार पर पोर्टल की कमियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। जैसे ही तकनीकी समस्याएँ सुलझेंगी, लंबित छात्रों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।