बैठक में मुख्य रूप से:
विवाह और तलाक के नियम
भरण-पोषण (मायना)
संपत्ति में उत्तराधिकार
लिव-इन रिलेशनशिप
जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई और प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव समिति के सामने रखे।
सामाजिक सुरक्षा का उठाया मुद्दा
कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि कानून बनाते समय उनकी पारंपरिक प्रथाओं और सांस्कृतिक पहचान को बचाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही विवाह पंजीयन और संपत्ति के अधिकारों को लेकर व्यवहारिक सुझाव भी दिए गए। परिचर्चा में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भरण-पोषण और वैवाहिक अधिकारों के मामले में एक मजबूत और समान व्यवस्था होनी चाहिए ताकि महिलाओं को उनका हक मिल सके।
संपत्ति और विवाह में बराबरी का दर्जा
वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने भी लोककला और जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को संपत्ति और विवाह से जुड़े मामलों में बराबरी का दर्जा देने की बात कही। कार्यक्रम के दौरान UCC समिति के सदस्य एम.के. राउत, मोहन पवार, ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े मौजूद रहे। उन्होंने सभी पक्षों की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और प्राप्त सुझावों को ड्राफ्ट में शामिल करने के लिए दर्ज किया।

