अनोखा कारनामा : भारतीय रेलवे ने रचा इतिहास, वंदे भारत बनी जीवनरक्षक मिशन की साथी
भारतीय रेलवे ने पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए सूरत से अहमदाबाद तक लगभग 230 किलोमीटर की दूरी पर जीवित हृदय (Live Heart) का सफल और समयबद्ध परिवहन किया। रेलवे, RPF, गुजरात पुलिस और मेडिकल टीमों के समन्वय से बनाए गए रेल ग्रीन कॉरिडोर की मदद से हृदय सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका प्रत्यारोपण किया जाना है।
कीर्तिमान डेस्क
01 Aug 2026, 03:31 PM
अहमदाबाद
भारतीय रेलवे ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए ऐसा कारनामा किया है, जो अब तक केवल सड़क मार्ग पर ग्रीन कॉरिडोर के जरिए ही संभव माना जाता था। पहली बार सूरत से अहमदाबाद के बीच करीब 230 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग को ग्रीन कॉरिडोर में बदलकर वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए एक जीवित हृदय (Live Heart) का सुरक्षित और तय समय में परिवहन किया गया। यह पहल अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में रेलवे की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अंग प्रत्यारोपण के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी जरूरत को देखते हुए भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए विशेष व्यवस्था की। ट्रेन के सूरत से रवाना होने के बाद पूरे रेल मार्ग पर उसकी आवाजाही को प्राथमिकता दी गई और आवश्यक परिचालन प्रबंधन के जरिए यह सुनिश्चित किया गया कि हृदय बिना किसी देरी के अहमदाबाद पहुंच सके। इस तरह पहली बार रेल नेटवर्क को प्रभावी ग्रीन कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल किया गया।
वंदे भारत से पहली बार पहुंचा जीवित हृदयवंदे भारत एक्सप्रेस से पहुंचाया गया जीवित हृदय
जीवित हृदय को ट्रेन संख्या 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से सूरत से अहमदाबाद लाया गया। निर्धारित समय के भीतर हृदय को सुरक्षित पहुंचाने के बाद इसे अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर ले जाया गया, जहां मरीज के लिए प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की जानी थी।
इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे कई एजेंसियों का समन्वय रहा। भारतीय रेलवे, गुजरात राज्य पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और चिकित्सा विशेषज्ञों ने मिलकर हर चरण की बारीकी से योजना बनाई। सभी टीमों ने यह सुनिश्चित किया कि हृदय का परिवहन पूरी सुरक्षा और तय समयसीमा के भीतर पूरा हो, जिससे प्रत्यारोपण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
स्टेशन से अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर
अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद भी समय की अहमियत को देखते हुए प्लेटफॉर्म नंबर-1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक अलग से ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। रेलवे सुरक्षा बल और गुजरात पुलिस की मदद से अंग को तेज़ी और सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाया गया, ताकि मरीज को समय पर उपचार मिल सके। अहमदाबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) वेद प्रकाश ने इस उपलब्धि को भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि जीवनरक्षक मिशनों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में रेलवे की भूमिका निभाना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च दायित्व है। उन्होंने इस अभियान की सफलता का श्रेय रेलवे, आरपीएफ, गुजरात पुलिस और चिकित्सा टीमों के उत्कृष्ट समन्वय को दिया।
अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल रेल ग्रीन कॉरिडोर के बाद भविष्य में लंबी दूरी पर अंगों के तेज और सुरक्षित परिवहन के लिए रेलवे एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों का उपयोग आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है और गंभीर मरीजों के लिए समय पर उपचार सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।