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NISAR सैटेलाइट से दिखी अंटार्कटिका की हमिंगबर्ड जैसी आकृति
NISAR सैटेलाइट से दिखी अंटार्कटिका की हमिंगबर्ड जैसी आकृति
राष्ट्रीय

अनोखी तस्वीर : अंतरिक्ष से दिखा अंटार्कटिका का रहस्यमयी पक्षी, असली कहानी जानकर वैज्ञानिक भी हैरान

NASA और ISRO के NISAR सैटेलाइट ने पूर्वी अंटार्कटिका की बर्फ में पक्षी जैसी दिखने वाली एक अनोखी आकृति कैद की है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘हमिंगबर्ड’ नाम दिया है। यह असल में बर्फ के बीच से निकली एक चट्टानी पर्वत चोटी है, जिसे नुनाटक कहा जाता है। NISAR की रडार तकनीक जो ग्लेशियरों की गति, बर्फ में बदलाव और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में वैज्ञानिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 23 Jul 2026, 03:57 PM · अपडेट: 31 Oct 2026, 10:24 PM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
अंतरिक्ष से ली गई एक तस्वीर ने वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। NASA और ISRO के संयुक्त मिशन NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) सैटेलाइट ने पूर्वी अंटार्कटिका की बर्फीली सतह पर एक ऐसी आकृति कैद की है, जो देखने में विशाल पक्षी जैसी नजर आ रही है। वैज्ञानिकों ने इस अनोखी संरचना को ‘हमिंगबर्ड’ नाम दिया है। हालांकि, यह कोई वास्तविक पक्षी नहीं है। यह आकृति अंटार्कटिका की बर्फ की चादर के बीच से बाहर निकली एक विशाल चट्टानी पर्वत चोटी है। वैज्ञानिक भाषा में ऐसी बर्फ से बाहर निकली हुई पहाड़ी चोटियों को ‘नुनाटक’ कहा जाता है।

बर्फ के बीच छिपा है विशाल पर्वत 

NISAR की तस्वीर में दिखाई दे रही यह संरचना पूर्वी अंटार्कटिका में मौजूद ‘नुनाटक ज़ातेरजावशिज्जा’ है। यह चट्टानी हिस्सा चारों ओर फैली विशाल बर्फ की चादर के बीच से ऊपर उठा हुआ है। अंटार्कटिका में मौजूद ग्लेशियर लगातार समुद्र की ओर बढ़ते रहते हैं। जब बर्फ की यह विशाल धारा इस पहाड़ी चोटी से टकराती है तो इसके आसपास दबाव बढ़ जाता है। इससे वैज्ञानिकों को ग्लेशियरों की गति और बर्फ की संरचना को समझने में मदद मिलती है। 

रडार तकनीक ने दिखाई बर्फ की छिपी दुनिया 

यह तस्वीर अगस्त 2025 में NISAR के एडवांस्ड L-बैंड रडार की मदद से ली गई थी। खास बात यह है कि इस तस्वीर को सामान्य कैमरे से नहीं बल्कि माइक्रोवेव संकेतों के जरिए तैयार किया गया है। आमतौर पर अंतरिक्ष से देखने पर अंटार्कटिका का बड़ा हिस्सा सिर्फ सफेद बर्फ जैसा दिखाई देता है, लेकिन NISAR की रडार तकनीक बर्फ की सतह और उसके अंदर मौजूद बदलावों को अलग-अलग रूप में पहचान सकती है। तस्वीर में दिखाई देने वाले रंग बर्फ की सतह से वापस लौटने वाले रडार संकेतों को दर्शाते हैं। चिकनी सतहों से अलग तरह के सिग्नल मिलते हैं, जबकि दरारों और ऊबड़-खाबड़ हिस्सों में रडार तरंगें बिखर जाती हैं, जिससे उनकी अलग पहचान बनती है।

जलवायु अध्ययन में मिलेगी बड़ी मदद 

वैज्ञानिकों के लिए यह तस्वीर सिर्फ एक खूबसूरत दृश्य नहीं है, बल्कि पृथ्वी के बदलते पर्यावरण को समझने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। NISAR सैटेलाइट की खासियत यह है कि यह बादलों, अंधेरे और कठिन मौसम परिस्थितियों में भी धरती की सतह की जानकारी जुटा सकता है। इससे वैज्ञानिक ग्लेशियरों की चाल, बर्फ की चादरों में हो रहे बदलाव और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का बेहतर अध्ययन कर सकेंगे। अंटार्कटिका जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बर्फ के छोटे-छोटे बदलाव भी समुद्र के स्तर और वैश्विक जलवायु पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में NISAR मिशन से मिलने वाली जानकारियां भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
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