जिले में कृषि शिक्षा को व्यवहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की जा रही है। विद्यालय में विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर खेतों, नर्सरी और कृषि प्रायोगिक प्रक्षेत्र में प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी सोच के साथ विद्यालय का संदेश है— "जहाँ कृषि किताबों में नहीं, खेतों में सिखाई जाती है।"
विद्यालय की प्राचार्य एस. बी. लाल के मार्गदर्शन में कृषि संकाय के विद्यार्थियों को आधुनिक खेती, पौध उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन, जैविक खेती, उन्नत कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन तथा कीट एवं रोग नियंत्रण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

खेतों में सीख रहे खेती की बारीकियां
व्यावसायिक कृषि प्रशिक्षक दिनेश कुमार सोनी (वी.टी.) के नेतृत्व में छात्र-छात्राएं स्वयं खेतों में कार्य करते हुए खेती की तकनीकों को समझ रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान पौध तैयार करना, कलम एवं ग्राफ्टिंग, सब्जी उत्पादन, फलदार पौधों का प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था, उर्वरक प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग का अभ्यास कराया जाता है। वर्तमान में पाठ्यक्रम के अनुरूप विद्यार्थियों को बैंगन, मिर्च और टमाटर की खेती के साथ-साथ कीट एवं रोग प्रबंधन की प्रयोगात्मक जानकारी भी दी जा रही है।
आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक सोच पर जोर
विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में कृषि के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना तथा स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। विद्यालय का यह प्रयास क्षेत्र में कृषि शिक्षा का एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है। विद्यालय परिवार ने अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से व्यवहारिक कृषि शिक्षा अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा है कि कृषि को आधुनिक, सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए व्यावहारिक ज्ञान बेहद आवश्यक है।
पहल की हुई सराहना
इस कार्यक्रम की हितेंद्र शर्मा, दीपक शर्मा, टी. देवांगन, रोहित मिश्रा, विजय गिरी गोस्वामी, नरेश विश्वकर्मा, शोभा दीवान, आशा सिन्हा, कोमल साहू, भुवन साहू, रिचा पटेल, सुषमा साहू, मधुमति डहरिया, रेणुका शर्मा, दिव्या ताम्रकर, उमाशंकर पटेल, मोनिका मोंगरे, संगीता टांडेकर, सलिल चौधरी, हेमकुमारी नेताम, डुमेश्वरी साहू, गोदावरी साहू, कौसर, पद्मा दीवान, मितेश श्याम, अनीता, दीपांशु, सेवन, गायत्री सहित अनेक लोगों ने सराहना की।