US Defense Industry: मध्य पूर्व में जारी तनाव और यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी रक्षा तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, क्या सिर्फ हथियारों का ज़खीरा बढ़ाना काफी है? हाल ही में आयोजित 'एयर एंड स्पेस साइबर कॉन्फ्रेंस' के दौरान रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य अधिकारियों ने साफ किया कि अमेरिका को अब सिर्फ पुराने हथियारों की भरपाई करने के बजाय 'सही हथियारों के मिश्रण' (Right Mix) पर ध्यान देना होगा।
सॉफ्टवेयर के मामले में पिछड़ रहा है सिस्टम
सम्मेलन में शामिल टेक कंपनी Rise8 के सीईओ ब्रायन क्रोगर ने एक कड़वी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युद्धक्षेत्र की स्थितियाँ महीनों में नहीं, बल्कि मिनटों में बदल जाती हैं। ऐसे समय में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की धीमी गति एक बड़ी चुनौती बन गई है। क्रोगर के मुताबिक, कई मामलों में हार्डवेयर तैयार करने से भी ज्यादा समय सॉफ्टवेयर बनाने में लग रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लंबे सफर वाले विमानों के लिए हवा में ही ईंधन भरने की व्यवस्था होती है, उसी तरह सॉफ्टवेयर को भी लगातार और तुरंत अपडेट करने का ढांचा बनना चाहिए।
सरकारी मंजूरी का लंबा इंतजार और सप्लाई चेन की बाधाएँ
तकनीकी बदलावों को लागू करने में सबसे बड़ी रुकावट लालफीताशाही और धीमी प्रक्रियाएँ हैं। क्रोगर ने बताया कि उनकी कंपनी का 80 से 85 प्रतिशत समय केवल सरकारी मंजूरी (ATO) पाने के इंतजार में बीत जाता है। एक बार मंजूरी के कैलेंडर में नाम दर्ज कराने में छह महीने का समय लगता है, और यदि परीक्षण के दौरान कोई कमी निकल आई, तो प्रक्रिया फिर से शून्य से शुरू होती है। इस कारण एक सामान्य अपडेट में भी 12 से 18 महीने लग जाते हैं। वहीं, ओंडास सेंटिनल के सीईओ रयान हार्टमैन का मानना है कि रक्षा उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और टेस्टिंग की है।
तकनीकी बदलावों को लागू करने में सबसे बड़ी रुकावट लालफीताशाही और धीमी प्रक्रियाएँ हैं। क्रोगर ने बताया कि उनकी कंपनी का 80 से 85 प्रतिशत समय केवल सरकारी मंजूरी (ATO) पाने के इंतजार में बीत जाता है। एक बार मंजूरी के कैलेंडर में नाम दर्ज कराने में छह महीने का समय लगता है, और यदि परीक्षण के दौरान कोई कमी निकल आई, तो प्रक्रिया फिर से शून्य से शुरू होती है। इस कारण एक सामान्य अपडेट में भी 12 से 18 महीने लग जाते हैं। वहीं, ओंडास सेंटिनल के सीईओ रयान हार्टमैन का मानना है कि रक्षा उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और टेस्टिंग की है।
आगे का रास्ता: प्रदर्शन और क्षमता पर ज़ोर
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी यूरोप और मध्य पूर्व के युद्धों ने यह साबित कर दिया है कि समय बहुत कीमती है। अब रक्षा अनुबंध (Contracts) केवल पारंपरिक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन कंपनियों को मौका मिलेगा जो तुरंत लागू होने वाले और व्यावहारिक समाधान दे सकेंगी। चर्चा के अंत में रयान हार्टमैन ने पूरे मामले को एक ही वाक्य में समेटा: भविष्य के किसी भी संघर्ष में खुद को मजबूत स्थिति में रखने के लिए सरकार और उद्योग को यह सुनिश्चित करना होगा कि युद्ध शुरू होने से पहले ही हमारे पास पर्याप्त क्षमता मौजूद हो।

