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चांद पर NASA का स्थायी बेस
चांद पर NASA का स्थायी बेस
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अमेरिका : NASA का ऐतिहासिक मिशन, चांद पर होगा स्थायी ठिकाना

NASA ने चांद पर स्थायी लूनर बेस बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। एजेंसी इस साल तीन मिशन लॉन्च करेगी, जिनके जरिए चांद पर भविष्य के बेस के लिए जरूरी तकनीक और संसाधन पहुंचाए जाएंगे। इस मिशन को अमेरिका और चीन के बीच नई स्पेस रेस के रूप में भी देखा जा रहा है।

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प्रकाशित: 27 May 2026, 12:10 PM · अपडेट: 30 Sep 2026, 03:21 AM
वाशिंगटन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
NASA ने चांद को लेकर अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक का खुलासा किया है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने ऐलान किया है कि वह आने वाले वर्षों में चांद पर स्थायी लूनर बेस बनाएगी, जहां लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी संभव हो सकेगी। इस योजना को अमेरिका के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे बड़ा मिशन माना जा रहा है। NASA के प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने घोषणा की कि एजेंसी इस साल के अंत तक चांद से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मिशन लॉन्च करेगी। इन मिशनों का उद्देश्य चांद पर भविष्य के स्थायी बेस के लिए जरूरी तकनीक, उपकरण और वैज्ञानिक संसाधनों को पहुंचाना होगा।  यह केवल वैज्ञानिक मिशन नहीं है, बल्कि इसके जरिए अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी रणनीतिक बढ़त भी बनाए रखना चाहता है। खास बात यह है कि इस योजना के साथ अमेरिका और चीन के बीच नई “स्पेस रेस” भी तेज होती दिखाई दे रही है।

तीन मिशनों से होगी लूनर बेस की शुरुआत

NASA के मुताबिक शुरुआती तीन मिशनों का नेतृत्व ब्लू ओरिजिन, एस्ट्रोबोटिक और इंट्यूटिव मशीन्स करेंगी। इन मिशनों के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उपकरण, रोवर्स, वैज्ञानिक पेलोड और निर्माण से जुड़ी तकनीक भेजी जाएगी। ब्लू ओरिजिन का “ब्लू मून एमके-1” लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला निजी मिशन होगा। वहीं एस्ट्रोबोटिक का मिशन अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल लूनर पेलोड लेकर जाएगा। इंट्यूटिव मशीन्स का मिशन चांद की सतह पर वैज्ञानिक अध्ययन करेगा और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के उपकरण भी साथ ले जाएगा। NASA का कहना है कि इन शुरुआती मिशनों से चांद पर ऊर्जा, संचार और आवास से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने की तैयारी शुरू होगी।

“अमेरिका अब चांद को कभी नहीं छोड़ेगा”

NASA प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने इस योजना को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि “अमेरिका अब चांद को कभी नहीं छोड़ेगा।” उनका कहना है कि भविष्य में चांद केवल वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वहां इंसानों की स्थायी मौजूदगी स्थापित की जाएगी। उन्होंने बताया कि चांद पर बेस बनने से अमेरिका को कई फायदे मिलेंगे। वहां वैज्ञानिक रिसर्च की जा सकेगी, पानी और खनिज जैसे संसाधनों की खोज होगी और मंगल ग्रह तक यात्रा के लिए चांद एक लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। NASA के अनुसार चांद पर मौजूद बर्फ भविष्य में पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन बनाने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि चांद का दक्षिणी ध्रुव इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।

तीन चरणों में पूरा होगा मिशन

NASA ने चांद पर बेस बनाने के लिए तीन चरणों वाली योजना तैयार की है। पहले चरण में 2026 से 2028 के बीच परीक्षण, रोबोटिक मिशन और बुनियादी ढांचे की तैयारी की जाएगी। दूसरे चरण में 2029 से 2032 के बीच अस्थायी बेस और जरूरी सुविधाओं का निर्माण होगा। इसके बाद तीसरे चरण में 2032 के बाद चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह लूनर बेस आने वाले समय में सैकड़ों वर्ग मील तक फैल सकता है। इसके लिए सोलर और न्यूक्लियर पावर सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क और परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

चीन के साथ तेज होगी स्पेस रेस

 NASA की यह घोषणा केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा भी है। चीन भी 2030 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने और वहां रिसर्च स्टेशन बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। इसी वजह से अमेरिका अब अंतरिक्ष में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। NASA ने अपने पुराने लूनर गेटवे स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट को सीमित करते हुए सीधे चांद की सतह पर बेस बनाने पर ज्यादा फोकस शुरू कर दिया है। आने वाले वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच चांद पर वैज्ञानिक और रणनीतिक प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

मंगल मिशन की तैयारी में भी मिलेगी मदद

NASA का कहना है कि चांद पर स्थायी बेस भविष्य में मंगल मिशन के लिए बेहद अहम साबित होगा। चांद का कम गुरुत्वाकर्षण और वहां उपलब्ध संसाधन लंबी अंतरिक्ष यात्राओं को आसान बना सकते हैं।इसी दिशा में NASA न्यूक्लियर पावर्ड स्पेसक्राफ्ट और एडवांस रोबोटिक सिस्टम पर भी काम कर रहा है। एजेंसी का लक्ष्य है कि आने वाले दशक में इंसानों को मंगल ग्रह तक भेजने की तैयारी पूरी की जाए।

अंतरिक्ष विज्ञान के नए युग की शुरुआत

NASA की यह योजना अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। Apollo मिशनों के दशकों बाद अब अमेरिका फिर से चांद पर अपनी मजबूत मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि यह मिशन सफल होता है, तो भविष्य में चांद पर इंसानी बस्तियां बसाने का सपना भी हकीकत बन सकता है।
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