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भिलाई जेपी सीमेंट प्लांट
भिलाई जेपी सीमेंट प्लांट
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वेतन का इंतजार : ढाई साल से सैलरी नहीं मिली, उम्मीद के सहारे डटे हैं 130 कर्मचारी

भिलाई के जेपी सीमेंट प्लांट के करीब 130 कर्मचारी पिछले 27-28 महीनों से वेतन नहीं मिलने के बावजूद रोज प्लांट पहुंचकर हाजिरी लगा रहे हैं। दिवालिया प्रक्रिया में फंसी कंपनी से कर्मचारियों को अब भी उम्मीद है कि बकाया वेतन और अन्य भुगतान जल्द मिल सकेगा। लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे कई कर्मचारी कर्ज लेकर परिवार चला रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 16 Jul 2026, 11:58 AM · अपडेट: 15 Sep 2026, 02:44 AM
भिलाई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
भिलाई स्थित जेपी सीमेंट प्लांट में काम करने वाले करीब 130 कर्मचारी पिछले 27 से 28 महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। आर्थिक संकट के बावजूद कर्मचारी आज भी रोजाना प्लांट पहुंच रहे हैं। सुबह और शाम अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद वे दूसरे कामों में जुट जाते हैं।
कर्मचारियों को उम्मीद है कि कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका वर्षों से लंबित वेतन और अन्य भुगतान मिल सकेगा। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब भी भरोसा है कि कंपनी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका बकाया एक साथ मिलेगा। इसी उम्मीद के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ने के बजाय प्लांट आना जारी रखा है। 

दिवालिया प्रक्रिया से बदली स्थिति

दरअसल, जेपी सीमेंट कंपनी को 18 अक्टूबर 2025 को दिवालिया घोषित किया गया था। इसके बाद कंपनी में कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) लागू कर दी गई। अब कंपनी के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) आशुतोष खेमानी के पास है। दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद कंपनी का पुराना बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भंग हो चुका है। पुराने अधिकारियों के पास अब किसी भी तरह का प्रशासनिक या वित्तीय निर्णय लेने का अधिकार नहीं बचा है। जेपी सीमेंट प्लांट के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट और वर्तमान यूनिट हेड पीके सिंह ने बताया कि 18 अक्टूबर 2025 के बाद से कंपनी से जुड़े किसी भी बड़े फैसले का अधिकार उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि अब पूरी जिम्मेदारी आईआरपी के पास है और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भी समाप्त हो चुका है। 

कर्ज लेकर परिवार चला रहे कर्मचारी

उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को न तो नौकरी से हटाने का आदेश दिया गया और न ही उन्हें काम बंद करने के लिए कहा गया। वहीं, कंपनी की ओर से कोई नया काम भी नहीं सौंपा गया है। इसी कारण कर्मचारी रोजाना प्लांट पहुंचकर अपनी हाजिरी लगाते हैं और फिर अन्य कामों के लिए निकल जाते हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, प्लांट में करीब 150 ऑन रोल कर्मचारी हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारी पिछले ढाई साल से वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। 
कई कर्मचारियों ने परिवार का खर्च चलाने के लिए बैंक से लोन लिया है तो कुछ लोग क्रेडिट कार्ड और निजी उधारी के सहारे गुजारा कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि प्रत्येक कर्मचारी का करीब 10 से 15 लाख रुपए तक वेतन और अन्य भुगतान बचा है। कर्मचारियों को हर महीने करीब 30 से 40 हजार रुपए वेतन मिलता था, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

कंपनी पर करीब 100 करोड़ रुपए की देनदारी

जानकारी के अनुसार, ओडिशा के कटक स्थित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने अक्टूबर 2025 में जेपी सीमेंट प्रबंधन के खिलाफ आदेश जारी करते हुए सीआईआरपी प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद आशुतोष खेमानी को अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया गया। आईआरपी की निगरानी में कंपनी की संपत्तियों, देनदारियों और विभिन्न दावों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कंपनी पर करीब 100 करोड़ रुपए की देनदारी थी, जिसमें कई लेनदारों और स्थानीय निकायों का बकाया भी शामिल है। जेपी सीमेंट प्लांट के सुपरवाइजर पुष्पेंद्र परमार की आत्महत्या के बाद कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। लंबे समय से वेतन नहीं मिलने और भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बीच कर्मचारी अब भी कंपनी की प्रक्रिया पूरी होने और बकाया राशि मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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