Vibe Film Review: हिंदी सिनेमा में अरसे से एक ऐसी जासूसी Comedy का इंतजार था, जो बिना किसी बेवजह के ज्ञान के दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर सके। कुणाल खेमू के निर्देशन में बनी फिल्म 'वाइब' ठीक यही काम करती है। यह एक हल्की-फुल्की, मजेदार और मस्ती से भरी फिल्म है जो शुरुआत से अंत तक बांधे रखती है।
फिल्म की कहानी हार्दिक (कुणाल खेमू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक सुस्त और बेफिक्र किस्म का युवा है। हालांकि, इस आलसी मिजाज के पीछे एक शातिर कोडर छुपा है, जिसे सही दिशा मिलने पर वह अपना कमाल दिखाता है। कुणाल खेमू ने अपनी इस दूसरी निर्देशित फिल्म में कास्टिंग पर बेहतरीन काम किया है: स्पर्श श्रीवास्तव: गंभीर छवि वाले 'बग्स' के किरदार में उन्होंने कुणाल के साथ बेहतरीन संतुलन बनाया है।
वंशिका धीर: अपनी नई शुरुआत के साथ ही वे पर्दे पर काफी प्रभावशाली और आकर्षक लगी हैं। प्रीति जिंटा: 'मैडम एच' के रोल में नजर आईं प्रीति जिंटा सीरियस-कॉमेडी टोन को बखूबी संभालती हैं। सह-कलाकार: यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव ने भी अपनी टाइमिंग से दृश्यों को मनोरंजक बनाया है। सरप्राइज अपीयरेंस: दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का एक छोटा सा रोल फिल्म का एक बड़ा सरप्राइज एलिमेंट है, जिसमें उनका कॉमिक टाइमिंग कमाल का दिखता है।
निर्देशन और मेकिंग
'ज़ख्म' से एक बाल कलाकार के रूप में दिल जीतने वाले कुणाल खेमू ने बतौर निर्देशक 'मडगांव एक्सप्रेस' के बाद अपनी पकड़ को और मजबूत किया है। फिल्म की रफ्तार तेज है और इसका मुख्य मकसद दर्शकों को हंसाना है। बैंकॉक के दृश्यों, नाइटक्लब फाइट में 'किल बिल' के रेफरेंस और 'मैट्रिक्स' के लाल-नीले पिल वाले सीन जैसे फिल्मी संदर्भ (Pop Culture References) कहानी को और मजेदार बनाते हैं। एआई (AI) पर आधारित संवाद भी माहौल को हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं।
'ज़ख्म' से एक बाल कलाकार के रूप में दिल जीतने वाले कुणाल खेमू ने बतौर निर्देशक 'मडगांव एक्सप्रेस' के बाद अपनी पकड़ को और मजबूत किया है। फिल्म की रफ्तार तेज है और इसका मुख्य मकसद दर्शकों को हंसाना है। बैंकॉक के दृश्यों, नाइटक्लब फाइट में 'किल बिल' के रेफरेंस और 'मैट्रिक्स' के लाल-नीले पिल वाले सीन जैसे फिल्मी संदर्भ (Pop Culture References) कहानी को और मजेदार बनाते हैं। एआई (AI) पर आधारित संवाद भी माहौल को हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं।
