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युद्ध के बावजूद इजरायल का हथियार निर्यात 30% बढ़ा
युद्ध के बावजूद इजरायल का हथियार निर्यात 30% बढ़ा
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युद्धकाल बना अवसर : इजरायल के रक्षा उद्योग ने रचा नया इतिहास

इजरायल का रक्षा निर्यात वर्ष 2025 में 19 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा है। इसके साथ ही देश ने लगातार पांचवें वर्ष रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। इस बढ़ोतरी में मिसाइल, रॉकेट और एयर डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी भूमिका रही। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब इजरायल गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय स्तर पर ईरान से जुड़े सुरक्षा तनावों का सामना कर रहा है।

कीर्तिमान नेटवर्क
03 Jun 2026, 11:01 AM
तेल अवीव
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों के बीच इजरायल के रक्षा उद्योग ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। इजरायल के रक्षा मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 में देश का रक्षा निर्यात 19 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा है। इसके साथ ही इजरायल ने लगातार पांचवें वर्ष अपने रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। आधुनिक युद्ध तकनीक, उन्नत मिसाइल प्रणालियों और हवाई रक्षा उपकरणों की वैश्विक मांग बढ़ने से इजरायल के रक्षा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिला है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देशों ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए इजरायली हथियारों और रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखाई है।

मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम 

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में हुए कुल रक्षा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान मिसाइल, रॉकेट और एयर डिफेंस सिस्टम का रहा। दुनिया के कई देशों ने इजरायल की अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों को खरीदने में रुचि दिखाई है। इजरायल की विकसित की गई कई रक्षा प्रणालियां युद्ध के दौरान अपनी प्रभावशीलता साबित कर चुकी हैं। विशेष रूप से मिसाइल रोधी तकनीक और आधुनिक निगरानी प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग मिल रही है। यही वजह है कि रक्षा निर्यात में लगातार तेजी देखी जा रही है।

युद्ध के बीच बढ़ा निर्यात

यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब इजरायल की सेना एक साथ कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए गाजा संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया था। इसके बाद इजरायल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान चलाया, जो लंबे समय तक जारी रहा। गाजा के अलावा इजरायली सेना को लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ भी लगातार तनाव और सैन्य गतिविधियों का सामना करना पड़ा। वहीं क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ ईरान और उसके समर्थित संगठनों के साथ टकराव भी गहराता गया।

ईरान के साथ टकराव

मध्य पूर्व की राजनीति में इजरायल और ईरान लंबे समय से एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच तनाव कई बार खुली सैन्य कार्रवाई के स्तर तक पहुंच चुका है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान समर्थित संगठनों की गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजरायल लगातार चिंता व्यक्त करता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में इजरायल ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और मजबूत किया है। उन्नत हथियारों और रक्षा प्रणालियों के सफल प्रदर्शन ने वैश्विक स्तर पर उसकी रक्षा तकनीक की विश्वसनीयता बढ़ाई है, जिसका सीधा प्रभाव निर्यात आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

हूती विद्रोहियों के खिलाफ  कार्रवाई

इजरायल की सैन्य गतिविधियां केवल गाजा और लेबनान तक सीमित नहीं रहीं। लाल सागर क्षेत्र में जहाजों पर हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी इजरायली वायुसेना ने कई अभियानों को अंजाम दिया है। इन सैन्य अभियानों ने इजरायल की वायु शक्ति और सटीक हमले करने की क्षमता को प्रदर्शित किया, जिससे उसकी रक्षा तकनीकों की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई।

बड़े हथियार निर्यातकों में शामिल

इजरायल पहले से ही दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातक देशों में गिना जाता है। अमेरिका, फ्रांस, रूस और अन्य बड़े रक्षा उत्पादक देशों के साथ प्रतिस्पर्धा के बावजूद इजरायल ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और नवाचार के दम पर वैश्विक बाजार में मजबूत स्थान बनाया है। आधुनिक युद्धों में ड्रोन, साइबर सुरक्षा, मिसाइल रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की बढ़ती भूमिका के कारण इजरायल के रक्षा उद्योग के लिए आने वाले वर्षों में भी अवसर बढ़ सकते हैं।

वैश्विक सुरक्षा पर असर

रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि यह संकेत देती है कि दुनिया भर में सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं और देश अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर अधिक निवेश कर रहे हैं। इजरायल के लिए यह आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मध्य पूर्व में जारी संघर्षों और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाएं कब मजबूत होंगी। फिलहाल इतना तय है कि युद्ध के माहौल के बीच इजरायल का रक्षा उद्योग अभूतपूर्व वृद्धि के दौर से गुजर रहा है।
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