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रायपुर-भिलाई समेत 8 शहरों में लगेंगे CBG प्लांट
रायपुर-भिलाई समेत 8 शहरों में लगेंगे CBG प्लांट
रायपुर

कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा : हरित ऊर्जा का नया मॉडल, 8 नगर निगमों में लगेंगे CBG प्लांट

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए आठ नगर निगम क्षेत्रों में CBG प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। इन प्लांटों में जैविक कचरे, पराली और पशु अपशिष्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस तैयार की जाएगी। इससे किसानों को अतिरिक्त आय, रोजगार के अवसर और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 04 Aug 2026, 12:02 PM · अपडेट: 06 Nov 2026, 09:42 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और बेहतर कचरा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के आठ प्रमुख नगर निगम क्षेत्रों में कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन प्लांटों में शहरों से निकलने वाले जैविक कचरे, कृषि अवशेष (पराली) और पशु अपशिष्ट का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल ईंधन तैयार किया जाएगा। 
सरकार की नई CBG कंप्रेस्ड बायोगैस नीति के तहत इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जहां एक ओर कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करना है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना है। 

रायपुर, भिलाई समेत 8 शहरों में स्थापित होंगे प्लांट 

राज्य सरकार ने CBG कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने के लिए रायपुर, भिलाई, बिलासपुर सहित आठ नगर निगम क्षेत्रों में जमीन चिन्हित कर ली है। परियोजना शुरू होने के बाद शहरों में निकलने वाले गीले और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग हो सकेगा। अभी कई जगहों पर जैविक कचरे का निपटारा चुनौती बना हुआ है। CBG प्लांट बनने से इस कचरे को लैंडफिल में भेजने के बजाय उससे उपयोगी ऊर्जा तैयार की जाएगी। इससे शहरों की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी और कचरा प्रबंधन की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

पराली और कृषि अवशेष से किसानों को मिलेगा फायदा 

इस योजना का लाभ केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को भी इससे आर्थिक फायदा मिलेगा। फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली और अन्य कृषि अवशेषों का उपयोग अब ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा। किसान इन कृषि अवशेषों को CBG (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांट तक पहुंचाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। इससे खुले में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और इससे होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा पशुपालकों के लिए भी यह योजना लाभकारी साबित होगी। पशुओं से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट का उपयोग प्लांटों में किया जाएगा, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर बनेंगे। 

CBG कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन से बदलेगा कचरे का उपयोग

CBG (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांटों में तैयार होने वाली कंप्रेस्ड बायो गैस की खरीद तेल विपणन कंपनियों द्वारा की जाएगी। इससे तैयार होने वाली गैस के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध होगा और परियोजना को लंबे समय तक संचालित करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह योजना ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। CBG उत्पादन के माध्यम से कचरे को उपयोगी संसाधन में बदला जाएगा, जिसे “वेस्ट टू वेल्थ” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

हरित ऊर्जा के साथ रोजगार के भी बढ़ेंगे अवसर 

CBG (कंप्रेस्ड बायोगैस) प्लांटों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। प्लांट संचालन, कचरा संग्रहण, परिवहन और अन्य गतिविधियों में लोगों को काम मिलेगा। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, बेहतर कचरा प्रबंधन, किसानों की अतिरिक्त आय और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। आने वाले समय में यह परियोजना राज्य को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मदद कर सकती है।
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