Diwali Pollution: रायपुर में दिवाली का उत्साह चरम पर है। बाजारों में रौनक है, घरों में साफ-सफाई और सजावट का दौर चल रहा है। गुलाबी ठंड के बीच लोग त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन इस खुशहाल माहौल के बीच वायु प्रदूषण को लेकर चिंता भी बढ़ने लगी है। आशंका है कि आतिशबाजी के बाद शहर की हवा में धूल और जहरीले धुएं की मात्रा बढ़ सकती है। फिलहाल रायपुर के लिए राहत की बात यह है कि शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 54 से 78 के बीच बना हुआ है। यह संतोषजनक श्रेणी में आता है। हालांकि, पिछले दो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। साल 2024 में त्योहार के दौरान AQI 279 तक पहुंच गया था, जबकि 2025 में यह 149 दर्ज किया गया था।
इस बार भी प्रदूषण बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। शहर के मालवीय रोड, गोलबाजार और सदर बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में वाहनों की आवाजाही से निकलने वाला धुआं पहले से ही हवा की गुणवत्ता प्रभावित कर रहा है। वहीं, दिवाली की सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल भी प्रदूषण में इजाफा कर सकती है। त्योहार के दिन आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं स्थिति को और खराब कर सकता है।
दिवाली पर सेहत का कैसे रखें ध्यान?
वायु प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्या करें?
- ग्रीन पटाखों का सीमित इस्तेमाल करें: पटाखे चलाने से बचना बेहतर है। यदि इस्तेमाल करते हैं तो निर्धारित मानकों वाले ग्रीन पटाखों को ही सीमित मात्रा में जलाएं।
- N95 मास्क लगाएं: प्रदूषण बढ़ने पर घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का इस्तेमाल करें। इससे हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक कणों के संपर्क में आने का खतरा कम हो सकता है।
- आंखों का रखें ध्यान: धुएं से आंखों में जलन होने पर साफ पानी से धोएं। आंखों को बार-बार रगड़ने से बचें। परेशानी बनी रहने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- घर की सफाई गीले कपड़े से करें: सूखी झाड़ू लगाने के बजाय गीले कपड़े या पोछे का इस्तेमाल करें। इससे धूल के कण हवा में कम फैलेंगे।
- सांस के मरीज सावधानी बरतें: अस्थमा और सांस संबंधी दूसरी परेशानियों से जूझ रहे लोग आतिशबाजी वाले स्थानों पर जाने से बचें।
क्या न करें?
- ज्यादा धुआं छोड़ने वाले पटाखे न जलाएं: तेज आवाज और अधिक धुआं पैदा करने वाले पटाखों से दूरी बनाएं। प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
- प्लास्टिक और कचरा न जलाएं: घर की सफाई से निकले कचरे, प्लास्टिक और सूखी पत्तियों को खुले में जलाने से बचें। इससे हानिकारक गैसें निकलती हैं।
- प्रदूषण बढ़ने पर खिड़कियां खुली न रखें: बाहर धुएं और धूल का स्तर अधिक होने पर दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें।
- घर की धूल खुले में न झाड़ें: कालीन, पर्दे और फर्नीचर की धूल उड़ाने के बजाय गीले कपड़े से सफाई करें।
दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन उत्सव के साथ सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी न केवल प्रदूषण कम करने में मदद कर सकती है, बल्कि परिवार को सांस और आंखों से जुड़ी परेशानियों से भी बचा सकती है।












