न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं रुका काम, शासकीय भूमि पर निर्माण को लेकर विवाद
बसना विकासखंड के ग्राम कोटेनदरहा में शासकीय आम रास्ते पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि तहसील न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा। प्रशासन ने मामले में जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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कीर्तिमान न्यूज
30 Jul 2026, 08:15 AM
महासमुंद
बसना विकासखंड के ग्राम कोटेनदरहा में शासकीय आम रास्ते पर कथित अतिक्रमण का मामला अब प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करने लगा है। आरोप है कि तहसील न्यायालय से स्थगन आदेश जारी होने और संबंधित विभागों को निर्माण कार्य तत्काल रोकने के निर्देश दिए जाने के बावजूद शासकीय भूमि पर निर्माण कार्य लगातार जारी है। इससे न केवल न्यायालयीन आदेशों के पालन पर प्रश्न उठ रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक अमले की कार्यशैली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है।
कोटेनदरहा निवासी लालचंद अग्रवाल ने 1 जुलाई 2026 को नायाब तहसीलदार भंवरपुर के समक्ष शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि राजस्व अभिलेखों में आम रास्ता के रूप में दर्ज शासकीय भूमि खसरा नंबर 534 पर तिलोबाई सिदार द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण कराया जा रहा है।आवेदक का दावा है कि इसी रास्ते से उनकी निजी कृषि भूमि खसरा नंबर 674/4 तक पहुंचने का एकमात्र मार्ग है, जिसके बंद होने से कृषि कार्य पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए 2 जुलाई 2026 को नायाब तहसीलदार ललित सिंह ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी किया।
रास्ते पर निर्माणअपना पक्ष रखने के लिए जारी हुआ था नोटिस
आदेश की प्रतियां थाना सरायपाली, संबंधित पटवारी, ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच तथा दोनों पक्षों को भेजते हुए निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही दोनों पक्षों को 9 जुलाई को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 13 जुलाई को नायाब तहसीलदार ने संबंधित पटवारी को मौके पर जांच, पंचनामा एवं प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। हल्का पटवारी वृंदावती पटेल द्वारा की गई मौका जांच में प्रतिवेदन के अनुसार आवेदक की भूमि के सामने स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 534 पर कथित अतिक्रमण कर पक्का निर्माण किए जाने का उल्लेख किया गया।
स्थगन आदेश के बाद भी नहीं रूका निर्माण कार्य
जांच पंचनामा तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए उप तहसील न्यायालय भंवरपुर को सौंप दिया गया। हालांकि आवेदक का आरोप है कि जांच और स्थगन आदेश के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रुका और मौके पर लगातार काम चलता रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब न्यायालय का स्पष्ट स्थगन आदेश प्रभावी था, तब उसके पालन की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि आदेश की अवहेलना हुई है तो संबंधित पक्ष पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अनावेदक के विरूद्ध होगी कार्रवाई
इधर, मामले में नायाब तहसीलदार ललित सिंह ने कहा कि स्थगन आदेश जारी होने के बाद उसके पालन के लिए थाना एवं ग्राम पंचायत को विधिवत सूचना दी गई थी। यदि इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया है, तो संबंधित अनावेदक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।