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बागबाहरा में विश्व आदिवासी दिवस पर जुटे समाजजन।
बागबाहरा में विश्व आदिवासी दिवस पर जुटे समाजजन।
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बागबाहरा में गूंजा आदिवासी एकता का संदेश, भव्य आयोजन के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस

पीले गमछे और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाजजन, बाइक रैली और मादरी नृत्य ने बढ़ाया उत्साह; संस्कृति, परंपरा और सामाजिक अधिकारों पर हुई चर्चा

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 09 Aug 2026, 08:33 PM · अपडेट: 23 Sep 2026, 11:54 PM
बागबाहरा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को बागबाहरा में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और एकजुटता का भव्य नजारा देखने को मिला। सर्व आदिवासी समाज जिला महासमुंद के तत्वावधान में बागबाहरा मंडी प्रांगण में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। पीले गमछे और पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुष, युवा और बच्चे आयोजन में आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सर्व आदिवासी समाज की जिला कार्यकारिणी और आयोजन समिति की ओर से पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं। अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की गई थी। कार्यक्रम स्थल पर मंच, झंडा-बैनर, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भोजन, मीडिया प्रचार-प्रसार सहित अन्य व्यवस्थाएं की गईं।

युवाओं ने दिखाया उत्साह

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बाइक रैली प्रमुख आकर्षण रही। बड़ी संख्या में युवा बाइक लेकर रैली में शामिल हुए। पीले गमछे और पारंपरिक पहचान के साथ निकली रैली में आदिवासी एकता और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया गया। बाइक रैली की व्यवस्था की जिम्मेदारी अजय ध्रुव, ओमप्रकाश नेताम, हितेश्वर मरई, हेमसागर बिंझवार, ओमप्रकाश छेदैहा, टोपेश ध्रुव सहित युवा टीम ने संभाली।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम में आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। मादरी नृत्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और संगीत के माध्यम से समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया। मादरी नृत्य की व्यवस्था सुरेंद्र ठाकुर, हितेश्वर मरई, खिलावन पीडेटी, गणेश दीवान और लीलाधर नेताम ने संभाली, जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम की जिम्मेदारी विनोद दीवान को दी गई थी।

पारंपरिक तीर-कमान और घोड़ा रहा आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान से जुड़े कई आयोजन भी शामिल किए गए। कमार तीर-कमान और घोड़ा व्यवस्था ने लोगों का ध्यान खींचा। कमार तीर-कमान की व्यवस्था मोतीराम कमार, घासीराम मरई, पुष्पेंद्र मरावी और भोजराम ध्रुव ने संभाली। वहीं घोड़ा व्यवस्था की जिम्मेदारी मनराखन ठाकुर, दौलत दीवान, मोहर सिंह दीवान और हरियर दीवान को दी गई थी।

समाज की एकजुटता की पहचान

आयोजन में समाजजनों से पीला गमछा लेकर पहुंचने की अपील की गई थी। बड़ी संख्या में लोग पीला गमछा धारण कर कार्यक्रम में पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुषों और युवाओं ने कार्यक्रम स्थल को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया। आयोजन समिति की ओर से मातृ-पितृ, युवा-युवतियों और समाज के सभी वर्गों से पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होने की अपील की गई थी। इसका असर कार्यक्रम में साफ दिखाई दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित समाजिकजन
समाज की समस्याओं को सामने रखने की भी व्यवस्था

विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में केवल सांस्कृतिक आयोजन ही नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने रखने की भी व्यवस्था की गई। शिक्षा, स्वास्थ्य और भू-राजस्व से संबंधित समस्याओं को लेकर समाज के लोगों से शिकायत और ज्ञापन लिए गए।

इसके लिए कार्यक्रम स्थल पर अलग से समस्या शाखा बनाई गई थी। इसकी जिम्मेदारी अजय ध्रुव को सौंपी गई। आयोजन समिति का कहना था कि समाज के लोगों की समस्याओं को संबंधित विभागों और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए इस तरह की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

महिलाओं की रही भागीदारी

आयोजन में भोजली कार्यक्रम भी रखा गया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी रही। भोजली कार्यक्रम की व्यवस्था कुंजलाल ओटी, डेजी रानी नेताम, भूमिका ध्रुव, सावित्री नेताम, डिंपल ध्रुव एवं महिला टीम ने संभाली। इसके अलावा कोयतुर बिरसा मुंडा बालोद कार्यक्रम की जिम्मेदारी माधव मांझी, विद्याधर सोरी, बंशी बरिहा और तुलाराम ठाकुर को दी गई थी।

संस्कृति बचाने का संदेश

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। समाज के लोगों से अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की गई। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि समाज की उपलब्धियों, चुनौतियों और अधिकारों पर विचार करने का अवसर भी है।

पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता

कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज जिला महासमुंद के जिलाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, कार्यकारी जिलाध्यक्ष थानसिंह दीवान, मीडिया प्रभारी अजय ध्रुव सहित विभिन्न आदिवासी समाजों के जिलाध्यक्ष, राज एवं सर्कल अध्यक्ष, शासकीय अनुसूचित जनजाति कर्मचारी सेवक संघ के सदस्य, वरिष्ठ एवं प्रबुद्धजन तथा सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। समाज के विभिन्न संगठनों और इकाइयों की सहभागिता से कार्यक्रम को जिला स्तरीय स्वरूप मिला। बागबाहरा मंडी प्रांगण में समाज के अलग-अलग वर्गों की मौजूदगी से पूरे आयोजन में उत्साह का माहौल बना रहा।

संभाली अलग-अलग जिम्मेदारियां

कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए आयोजन समिति की ओर से अलग-अलग व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी तय की गई थी। डीजे धुमाल की व्यवस्था कृष्णा ध्रुव, हेमसागर बिंझवार, टोपेश ध्रुव, उमेश दीवान, पुरन सबर, दानवीर मरकाम, केवल पोडेटी और ओमप्रकाश नेताम ने संभाली। भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी मोहर दीवान एवं साथियों ने संभाली, जबकि लकड़ी व्यवस्था मुकेश ठाकुर और गौतम नेताम को दी गई। मंच संचालन चंद्रशेखर पोडेटी, विनोद दीवान और मुकेश ठाकुर ने किया। झंडा-बैनर की व्यवस्था ओमप्रकाश ध्रुव एवं साथियों ने संभाली। मीडिया और प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी ओमप्रकाश नेताम, अजय पोडेटी और ओमप्रकाश छेदैहा को दी गई थी।

संस्कृति, परंपरा और एकजुटता का संदेश 

बागबाहरा मंडी प्रांगण में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस का जिला स्तरीय कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति और सामाजिक एकजुटता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शामिल समाजजनों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और समाजहित के मुद्दों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आयोजन समिति के जिलाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, कार्यकारी जिलाध्यक्ष थानसिंह दीवान और मीडिया प्रभारी अजय ध्रुव ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी समाजजनों, पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों का आभार जताया। कार्यक्रम का आयोजन सर्व आदिवासी समाज जिला महासमुंद, आदिवासी ध्रुव गोंड समाज 52 गढ़ एवं शासकीय अनुसूचित जनजाति कर्मचारी सेवक संघ जिला महासमुंद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

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