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शिवपुरी में बड़ा मिसाइल इकोसिस्टम
शिवपुरी में बड़ा मिसाइल इकोसिस्टम
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युवाओं को रोजगार : शिवपुरी में बनने जा रहा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा प्राइवेट मिसाइल हब

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पाली गांव में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी मिसाइल इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। 2,500 करोड़ रुपये के इस डिफेंस प्रोजेक्ट से 10 हजार से अधिक रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है और यह भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कीर्तिमान न्यूज
05 Jul 2026, 08:57 AM
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के रक्षा क्षेत्र (डिफेंस सेक्टर) में एक बड़ा ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य का ग्वालियर-चंबल अंचल अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सैन्य ताकत को मजबूत करने वाले एक बड़े केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा। 
शिवपुरी जिले के पाली गांव में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा प्राइवेट मिसाइल इकोसिस्टम तैयार होने जा रहा है, जहां सेना के लिए 'मिशन रेडी' मिसाइलें और घातक गोला-बारूद के आधुनिक कंपोनेंट्स बनाए जाएंगे। इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रविवार (5 जुलाई 2026) को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा संयुक्त रूप से रखी गई। इस पूरे प्रोजेक्ट की कमान अडाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी के हाथों में है। 

आत्मनिर्भर बनाने के लए करोड़ों के निवेश 

कंपनी शिवपुरी के पाली गांव में करीब 103.18 हेक्टेयर भूमि पर इस अत्याधुनिक डिफेंस कॉरिडोर को विकसित कर रही है। देश की सुरक्षा को आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ इस परियोजना में कंपनी 2,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है। इस मेगा प्रोजेक्ट के जमीन पर उतरने से अंचल की पूरी आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद है। 

होंगे ज्यादा रोजगार के अवसर 

दावों के मुताबिक, इससे इलाके में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 10,050 से भी ज्यादा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को बड़ा फायदा मिलेगा। इस
सुरक्षा को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प
इंटीग्रेटेड कैंपस में मिसाइल निर्माण से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को एक ही छत के नीचे समेटा जाएगा। यहाँ सेना की मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाले सिंगल, डबल और ट्रिपल बेस प्रोपेलेंट, वारहेड (विस्फोटक हिस्सा) और अन्य जरूरी युद्ध सामग्री का उत्पादन किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारतीय सेनाओं को मिसाइल सप्लाई के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

चार कड़ियों में मुकम्मल होगा मिसाइल बनने का सफर

इस पूरे डिफेंस इकोसिस्टम को चार अलग-अलग और बेहद व्यवस्थित चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा:

  • पहला कदम (प्रोपेलेंट और टीएनटी का निर्माण): शुरुआत में इस हाई-टेक कैंपस के भीतर प्रोपेलेंट, टीएनटी (TNT) और युद्ध में काम आने वाले अन्य जरूरी विस्फोटक तैयार किए जाएंगे।

  • दूसरा कदम (मिसाइल असेंबलिंग): कैंपस में ही तैयार किए गए इन कंपोनेंट्स और कच्चे माल की मदद से 'मिशन रेडी' यानी सीधे युद्ध में दागे जाने लायक मिसाइलों का फाइनल स्ट्रक्चर खड़ा किया जाएगा।

  • तीसरा कदम (ऑटोमेटेड मिसाइल प्रोग्राम): अत्याधुनिक और पूरी तरह से ऑटोमेटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक ही समय पर कई अलग-अलग मिसाइल प्रोग्राम्स को यहां संचालित किया जाएगा।

  • चौथा कदम (सेना को सीधी सप्लाई): यहाँ से फाइनल टेस्टिंग के बाद पूरी तरह तैयार मिसाइलों को सीधे भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए भेज दिया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट न केवल मध्य प्रदेश को देश के नक्शे पर एक बड़े औद्योगिक और रक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि 'मेक इन इंडिया' के तहत भारतीय सेनाओं की विदेशी निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर देगा।

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