छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने 1 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत 2, 3 और 4 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला एवं जनपद मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ नेसरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान जारी 'मोदी की गारंटी' में संविदा, दैनिक वेतनभोगी, प्लेसमेंट, मानदेय और ग्राम रोजगार सहायकों के नियमितीकरण का वादा किया गया था। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई थी। लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक इन घोषणाओं पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि 1 जुलाई 2026 तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। संगठन का दावा है कि आंदोलन में जिला, जनपद और ग्राम स्तर पर कार्यरत मनरेगा कर्मचारी शामिल होंगे।
तीन मांगों पर अड़ा महासंघ
महासंघ ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, संविदा मनरेगा और वीबीजी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। दूसरी, नियमितीकरण होने तक मानव संसाधन नीति के तहत सभी संविदा और बीवीजी कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए। तीसरी, ग्राम रोजगार सहायकों को मजदूरी आधारित मानदेय के बजाय उचित वेतनमान निर्धारित किया जाए।
पहले भी उठती रही हैं मांगें
महासंघ का कहना है कि नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग लंबे समय से की जा रही है। कई बार सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से कम मानदेय और अस्थायी व्यवस्था में काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
महासंघ ने फिलहाल सरकार को 1 जुलाई तक का समय दिया है। यदि इस अवधि में मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो आंदोलन की समीक्षा की जाएगी। अन्यथा 2 जुलाई से जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन शुरू होगा। संगठन ने प्रदेशभर के सभी मनरेगा अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम रोजगार सहायकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।