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महतारी वंदन से बनी उद्यमी
महतारी वंदन से बनी उद्यमी
रायपुर संभाग

महतारी वंदन की बचत से बदली तकदीर : 18 हजार से शुरू किया कारोबार, अब गांव की महिलाओं को दे रहीं रोजगार

आरंग विकासखंड के ग्राम भानसोज की दुलारी माण्डले ने महतारी वंदन योजना से मिली सहायता राशि की बचत कर 18 हजार रुपये से ‘नड्डा’ और ‘मुर्कू’ का घरेलू व्यवसाय शुरू किया। आज उनका कारोबार हर महीने करीब 10 हजार रुपये का शुद्ध लाभ दे रहा है और गांव की 4 से 6 महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। दुलारी की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की प्रेरक मिसाल बन गई है।

कीर्तिमान ब्यूरो
प्रकाशित: 19 Jun 2026, 07:03 PM · अपडेट: 25 Jun 2026, 02:44 PM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

महतारी वंदन योजना की राशि को सिर्फ खर्च करने के बजाय बचाकर स्वरोजगार की राह चुनने वाली ग्राम भानसोज की दुलारी माण्डले आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं। कभी परिवार का गुजारा चलाने के लिए मजदूरी करने वाली दुलारी अब अपने घरेलू उद्योग से हर महीने करीब 10 हजार रुपए का शुद्ध लाभ कमा रही हैं। उनके इस काम से गांव की 4 से 6 महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।

दुलारी माण्डले ने बताया कि उन्होंने अपनी सास के साथ मिलकर महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली एक-एक हजार रुपए की मासिक सहायता राशि को लगातार नौ महीने तक बचाया। दोनों की संयुक्त बचत 18 हजार रुपए होने पर उन्होंने इसे स्वरोजगार में लगाने का फैसला किया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सलाह बनी मददगार

दुलारी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रभा माण्डले ने उन्हें घरेलू उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद पति के सहयोग से उन्होंने बाजार से कच्चा माल खरीदा और घर पर पारंपरिक खाद्य उत्पाद ‘नड्डा’ और ‘मुर्कू’ बनाना शुरू किया। आकर्षक पैकेजिंग के साथ उत्पादों को स्थानीय बाजार में उतारा गया।

बेटे ने संभाली मार्केटिंग की जिम्मेदारी

शुरुआत में उत्पादों की पहचान बनाना और बाजार तक पहुंच बनाना आसान नहीं था। ऐसे में दुलारी के बेटे ने नारा, कारहीडीह, मालीडीह, फरफौद, डिघारी और बरछा सहित आसपास के गांवों की किराना दुकानों तक उत्पाद पहुंचाने का काम संभाला। गुणवत्ता और स्वाद के कारण धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और मांग में लगातार इजाफा होने लगा।

अब हर महीने 10 हजार रुपए का शुद्ध लाभ

दुलारी के अनुसार कच्चा माल, मजदूरी और पैकेजिंग सहित सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने करीब 10 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी हो रही है। इस आय से वे बच्चों की पढ़ाई, परिवार की जरूरतें और भविष्य के लिए बचत कर रही हैं।

गांव की महिलाओं को भी मिला रोजगार

घरेलू उद्योग के विस्तार के साथ अब गांव की 4 से 6 महिलाएं भी इस काम से जुड़कर नियमित रोजगार पा रही हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक ऋतु परिहार ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे रही है। दुलारी माण्डले की सफलता इस बात का उदाहरण है कि छोटी बचत और सही दिशा में किया गया प्रयास बड़े बदलाव का कारण बन सकता है। दुलारी की कहानी आज ग्रामीण महिलाओं को यह संदेश दे रही है कि यदि योजना की राशि का योजनाबद्ध उपयोग किया जाए तो स्वरोजगार के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बना जा सकता है।

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