पश्चिम एशिया में गहराते संकट और उसके वैश्विक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य में खर्चों में कटौती और संसाधनों के संरक्षण के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से की गई 'चार अपीलों' पर त्वरित अमल करते हुए छत्तीसगढ़ के वित्त विभाग ने एक व्यापक दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) जारी किया है।
यह कड़ा वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासन आदेश तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक पूरे राज्य में लागू रहेगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (Twitter) पर इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी साझा की है।
आदेश की 8 बड़ी बातें
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शासकीय खर्चों को कम करने और पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित कड़े नियम तय किए गए हैं:
1. अफसरों की विदेश यात्रा पर 'रेड सिग्नल'
राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब किसी भी अत्यंत विशेष या अपरिहार्य परिस्थिति में विदेश जाने के लिए अधिकारियों को सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से पूर्व अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।
2. मंत्रियों-अफसरों के कारकेड (काफिले) में कटौती
आदेश में साफ किया गया है कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, निगम-मंडल के अध्यक्षों और विभिन्न आयोगों के पदाधिकारियों के कारकेड (काफिले) में केवल बेहद जरूरी वाहनों को ही शामिल किया जाए। फिजूल के वाहनों की फौज लेकर चलने पर पाबंदी होगी।
3. 'इलेक्ट्रिक व्हीकल' (EV) युग की शुरुआत
राज्य के सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे धीरे-धीरे अपने सभी शासकीय वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू करें।
4. पेट्रोल-डीजल की बचत और 'कार पूलिंग'
शासकीय वाहनों के कम से कम और बेहद जरूरी इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। ईंधन बचाने के उद्देश्य से अधिकारियों को आपस में 'कार पूलिंग' (एक ही गाड़ी में एक से अधिक अधिकारियों का सफर करना) करने की सलाह दी गई है।
5. फिजिकल मीटिंग्स बंद, वर्चुअल बैठकों पर जोर
अब हर छोटी-बड़ी समीक्षा के लिए अफसरों को राजधानी दौड़ने की जरूरत नहीं होगी। आदेश के मुताबिक, महीने में केवल एक बार ही भौतिक (फिजिकल) बैठक आयोजित की जा सकेगी। इसके अलावा अन्य सभी समीक्षा बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन माध्यम से ही की जाएंगी।
6. सरकारी दफ्तरों में 'ऊर्जा ऑडिट' और बिजली की बचत
दफ्तरों में बिजली की बर्बादी रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। ऑफिस टाइमिंग खत्म होते ही सभी विद्युत उपकरणों—जैसे लाइट, पंखे, एसी (AC) और कंप्यूटर को अनिवार्य रूप से बंद करना होगा।
7. 'पेपरलेस' कामकाज: ई-फाइलों को प्राथमिकता
पर्यावरण संरक्षण और खर्च कम करने के लिए प्रिंटेड बुकलेट और कागजी दस्तावेजों की जगह 'सॉफ्ट कॉपी' और 'ई-फाइलों' का उपयोग करने को कहा गया है।
8. 'iGOT कर्मयोगी पोर्टल' से होगा ऑनलाइन प्रशिक्षण
अब सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बड़े-बड़े फिजिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम्स आयोजित करने के बजाय केंद्र सरकार के iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। सभी विभागों को अपने विशिष्ट ट्रेनिंग कोर्स इस पोर्टल पर अपडेट करने को कहा गया है, ताकि भौतिक प्रशिक्षण की आवश्यकता न्यूनतम (न के बराबर) हो सके।
क्या थी पीएम मोदी की चार अपील
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को हैदराबाद की एक रैली में देश की जनता और सरकारों से चार महत्वपूर्ण अपील की थीं:
पहली अपील: पेट्रोल-डीजल की बचत करें, अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाएं और आने-जाने के लिए कार पूलिंग का सहारा लें।
दूसरी अपील: देश के विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कम से कम एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने का संकल्प लें।
तीसरी अपील: रासायनिक खादों (Chemical Fertilizers) का मोह छोड़कर देसी और जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ाएं।
चौथी अपील: गैर-जरूरी यात्राओं को टालें, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय या विदेश यात्राओं पर जाने से बचें।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी का संदेश: "माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी अपील को छत्तीसगढ़ में धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह कदम उठाया गया है। संकट के समय में संसाधनों की बचत और अनुशासन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए भी 'मितव्ययिता और पर्यावरण अनुकूल शासन' (Eco-friendly Governance) का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। सभी विभागों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी गई है।

