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भारत को पाक रक्षा मंत्री की बड़ी धमकी: तनाव बढ़ा
भारत को पाक रक्षा मंत्री की बड़ी धमकी: तनाव बढ़ा
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सीमा विवाद : भारत पर भड़का पाकिस्तान, रक्षा मंत्री बोले-इतिहास में धकेल देंगे

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की हालिया टिप्पणी के बाद भारत को लेकर तीखा बयान दिया है। आसिफ ने कहा कि यदि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई “दुस्साहस” किया, तो उसे “इतिहास के पन्नों में धकेल दिया जाएगा।” उन्होंने भारत का “भूगोल बदलने” तक की धमकी दी। इस बयान के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच इस तरह की बयानबाजी दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर असर डाल सकती है।

कीर्तिमान नेटवर्क
19 May 2026, 11:02 AM
इस्लामाबाद
 दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर तीखी बयानबाजी के कारण सुर्खियों में आ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ बेहद आक्रामक बयान देते हुए कहा है कि यदि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई “दुस्साहस” किया, तो उसे “इतिहास के पन्नों में धकेल दिया जाएगा।” इतना ही नहीं, उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान भारत का “भूगोल बदलने” की क्षमता रखता है। 
ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में आतंकवाद और सीमा सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही थी। भारतीय सेना प्रमुख की टिप्पणी के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और सैन्य हलकों में हलचल तेज हो गई और अब पाकिस्तानी नेतृत्व लगातार तीखे बयान दे रहा है। दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच इस तरह की बयानबाजी केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया भर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल पर भी गहरा असर डाल सकती है। खासकर ऐसे समय में जब सीमा पर गतिविधियां बढ़ी हुई हों और दोनों देशों के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हों।

भारतीय सेना प्रमुख के बयान के बाद बढ़ी कटुता 

हाल ही में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता रखती है। उन्होंने आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों को लेकर भी पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा था। जनरल द्विवेदी की इस टिप्पणी को पाकिस्तान में गंभीरता से लिया गया। पाकिस्तानी मीडिया चैनलों पर इस बयान को लेकर लगातार बहस होती रही और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “आक्रामक रणनीतिक संदेश” बताया। इसके बाद पाकिस्तान सरकार के कई नेताओं ने भारत के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया। इसी क्रम में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत को पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा और रक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है और यदि भारत ने कोई भी सैन्य कदम उठाया तो उसका जवाब “इतिहास में दर्ज होने वाला” होगा।

भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ ने पिछले वर्ष मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान ने उस समय भारत को “कड़ा और प्रभावी जवाब” दिया था। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि और प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित है और इसी कारण लगातार पाकिस्तान के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है। आसिफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना और रक्षा तंत्र पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने दावा किया कि यदि भारत ने किसी भी तरह की “आक्रामक कार्रवाई” की कोशिश की, तो पाकिस्तान उसका ऐसा जवाब देगा जिसे भारत कभी भूल नहीं पाएगा।  इस तरह के बयान अक्सर घरेलू राजनीतिक दबाव और जनता को संदेश देने के लिए दिए जाते हैं। पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में भारत विरोधी बयान वहां की आंतरिक राजनीति में समर्थन जुटाने का एक माध्यम भी माने जाते हैं।

दक्षिण एशिया की अस्थिरता की आशंका

भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की आक्रामक बयानबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जाता है। सीमा पर तनाव और राजनीतिक बयानबाजी कई बार हालात को अनियंत्रित दिशा में ले जा सकती है। नियंत्रण रेखा (LoC) पर पहले भी कई बार संघर्ष विराम उल्लंघन, गोलीबारी और घुसपैठ की घटनाएं सामने आती रही हैं। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। वहीं पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। लेकिन उरी हमला, पुलवामा हमला और अन्य आतंकी घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्तों में भारी गिरावट देखी गई थी। भारत ने साफ तौर पर कहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। वहीं पाकिस्तान लगातार कूटनीतिक बातचीत की वकालत करता रहा है। इसी वजह से दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है।

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति भी बड़ी वजह

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के नेताओं द्वारा भारत के खिलाफ दिए जाने वाले कई बयान घरेलू परिस्थितियों से भी जुड़े होते हैं। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकी गतिविधियों जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में सरकार और सेना अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत विरोधी मुद्दों को प्रमुखता देकर जनता का ध्यान आंतरिक समस्याओं से हटाने की कोशिश करती है। ख्वाजा आसिफ का हालिया बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पाकिस्तान की सेना वहां की राजनीति में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभाती है। इसलिए भारत को लेकर दिए जाने वाले बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सामरिक संदेश भी होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी लगातार नजर बनाए हुए है। अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई वैश्विक शक्तियां पहले भी दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद बनाए रखने की अपील कर चुकी हैं।  एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और कूटनीतिक संतुलन बेहद जरूरी है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और व्यापारिक संतुलन पर भी पड़ सकता है। हालांकि मौजूदा हालात में जिस तरह दोनों देशों के नेताओं और सैन्य अधिकारियों के बयान लगातार आक्रामक होते जा रहे हैं, उससे आने वाले समय में कूटनीतिक तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
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