"सौंदर्यीकरण" के लिए 28 परिणाम मिले
इको पार्क : वेस्ट टू बेस्ट का जीवंत उदाहरण, कबाड़ से कमाल तक की प्रेरक कहानी
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दुलदुला जनपद पंचायत में विकसित इको पार्क “वेस्ट टू बेस्ट” की अवधारणा का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहाँ पुराने टायरों, लोहे के कबाड़ और अन्य अनुपयोगी सामग्रियों से आकर्षक कलाकृतियाँ, झूले और सजावटी संरचनाएँ बनाई गई हैं। यह पार्क केवल सौंदर्य का केंद्र नहीं, बल्कि एक सामुदायिक स्थल भी है जहाँ ओपन जिम, बच्चों के खेल क्षेत्र और मनोरंजन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। जिला प्रशासन ने इसके पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए पौधरोपण और नियमित देखभाल के निर्देश दिए हैं। यह इको पार्क स्वच्छता, पुनर्चक्रण और रचनात्मकता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है और अन्य क्षेत्रों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सुशासन तिहार : उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने 9.95 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण व भूमिपूजन
पाटन नगर में सुशासन तिहार-2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उपमुख्यमंत्री अरुण साव शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने लगभग 9.95 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया, जिससे क्षेत्र की अधोसंरचना को मजबूती मिली। उन्होंने शिविर का निरीक्षण कर अधिकारियों को जनता की शिकायतों के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, धान खरीदी और महतारी वंदन योजना की जानकारी दी।
कीर्तिमान अतिथि
बदल रही तस्वीर : अविरल-निर्मल सितली की ओर बढ़ता महासमुंद, जनसहयोग से हो रहा नाले के कायाकल्प
महासमुंद के सितली नाला के कायाकल्प को लेकर जनसहयोग से बड़ा अभियान आकार ले रहा है। पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा और प्रगति पर विस्तार से जानकारी दी। बताया कि अविरल सितली, निर्मल सितली अभियान के तहत श्रमदान, अंशदान और समयदान के जरिए नागरिक खुद आगे आकर बदलाव की मिसाल पेश कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़
बीटीआई रोड चौड़ीकरण अधर में, धूल-गड्ढों में डूबी जनता की जिंदगी
महासमुंद की बीटीआई रोड का चौड़ीकरण कार्य पिछले कई महीनों से रुका हुआ है, जिससे सड़क की स्थिति बेहद खराब हो गई है। अधूरी खुदाई, बड़े-बड़े गड्ढे और लगातार उड़ती धूल के कारण यह मार्ग अब आम लोगों के लिए जोखिम भरा बन गया है।
धूल और खराब सड़क से स्थानीय निवासियों को सांस और आंखों की समस्याएं हो रही हैं, वहीं व्यापार भी प्रभावित हुआ है। अधूरी नालियों के कारण हल्की बारिश में जलभराव की स्थिति बन जाती है। काम रुकने के पीछे बकाया भुगतान, विभागीय समन्वय की कमी और मॉनिटरिंग में लापरवाही जैसे कारण बताए जा रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और वे जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।