"आजीविका डबरी" के लिए 7 परिणाम मिले
राज्य सरकार
Dhamtari News: आजीविका डबरी से किसान को मिला सिंचाई और मत्स्य पालन का लाभ
Dhamtari News: ग्राम पंचायत चिखली के आश्रित गांव माटेगहन में वीबीजीरामजी योजना के तहत निर्मित आजीविका डबरी किसान ईश्वर/नम्मु के लिए आर्थिक मजबूती का साधन बन गई है। 2.43 लाख रुपए
की स्वीकृति से बनी इस डबरी से करीब एक एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिली है। अब किसान वर्षा पर निर्भर रहने के बजाय समय पर फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं।
राज्य सरकार
विकास को नई दिशा : मनरेगा की आजीविका डबरी से बदली किसान की किस्मत
सरगुजा जिले के ग्राम अडची में मनरेगा के तहत बनी आजीविका डबरी किसान देवानंद के लिए आय और सिंचाई का मजबूत साधन बन गई है। लगभग 2 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस डबरी से वे खेती की सिंचाई के साथ-साथ मत्स्य पालन भी कर रहे हैं, जिससे उनकी अतिरिक्त आय बढ़ रही है।
छत्तीसगढ़
आजीविका डबरी बनी वरदान : बिसाहिन ने मछली पालन से बदली किस्मत, दोगुनी हुई आय
छत्तीसगढ़ के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम पहरनादादर की किसान बिसाहिन पहले वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थीं, जिससे उनकी आय सीमित थी। वर्ष 2025 में सरकारी योजना के तहत उनके खेत में लगभग 20×20 मीटर की आजीविका डबरी (कृषि तालाब) का निर्माण किया गया, जिसकी जल भंडारण क्षमता करीब 894 घन मीटर है। तालाब बनने के बाद उन्होंने मछली पालन शुरू किया और साथ ही रबी फसल व सब्जी उत्पादन भी करने लगीं। इससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उन्हें खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत मिला।
राज्य सरकार
धमतरी के भोथापारा में जल संरक्षण और मत्स्य पालन से ग्रामीण परिवार बने आत्मनिर्भर
धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के भोथापारा गांव में आजीविका डबरी योजना ने आदिवासी परिवारों को आर्थिक मजबूती दी है। वर्षा जल संचयन, सिंचाई सुविधा और मत्स्य पालन के जरिए परिवारों की आय बढ़ी और पलायन पर रोक लगी।
राज्य सरकार
बड़ी कामयाबी : मोर गांव-मोर पानी अभियान ने बदली गांवों की तस्वीर, जल संचयन से बढ़ेगी किसानों खुशहाली
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान जल संरक्षण का बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। जनभागीदारी से 2.85 लाख जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया, जिससे 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई। इस पहल से भूजल स्तर सुधार, किसानों को सिंचाई सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार
पानी अभियान : 551 ग्राम पंचायतों में भू-जल संवर्धन एवं प्राकृतिक संसाधन कार्यों को प्राथमिकता दी गई
महासमुंद जिले में मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0 और मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड स्तर पर जल संरक्षण कार्य किए गए। जिले की 551 ग्राम पंचायतों में 31 करोड़ लीटर पानी भंडारण क्षमता विकसित हुई है। पहली बारिश में सभी संरचनाएं भरने से भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़
दीदी के बखरी से बदली तस्वीर : कांकेर की 3,364 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, 25 हजार तक पहुंच रही मासिक आय
कांकेर जिला में “दीदी के बखरी” पहल के तहत महिलाएं सब्जी बाड़ी, मुर्गी पालन, मछली पालन और वनोपज संग्रहण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। बिहान योजना के अंतर्गत 3364 महिलाएं इस मॉडल से जुड़ी हैं और हर महीने 20-25 हजार रुपए तक कमा रही हैं। आने वाले समय में 10,780 महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिल रही है।