"प्राचीन मूर्तियां" के लिए 4 परिणाम मिले
बीजापुर
Indravati Tiger Reserve: माओवादी हिंसा खत्म, लेकिन बस्तर की सैकड़ों प्राचीन मूर्तियां आज भी असुरक्षित
Indravati Tiger Reserve: छिंदक नागवंश और काकतीय काल की सैकड़ों प्राचीन पाषाण प्रतिमाएं असुरक्षित पड़ी हैं। माओवादी हिंसा के कारण वर्षों तक इनका सर्वेक्षण नहीं हो सका। अब क्षेत्र में शांति और जंगल सफारी की तैयारियों के बीच इन ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा, सूचीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण की मांग उठ रही है।
राष्ट्रीय
भोपाल स्टेट म्यूजियम : मूर्ति का सच आया सामने, सरस्वती नहीं गायत्री हैं देवी
स मूर्ति को देवी सरस्वती माना जाता था, उसे अब देवी गायत्री की मूर्ति के रूप में पहचाना गया है। यह मूर्ति 12वीं सदी की है, जो परमार राजवंश के समय की है। शास्त्रों में वर्णित देवी गायत्री के स्वरूप और वीणा की अनुपस्थिति इसके मुख्य प्रमाण हैं।
राष्ट्रीय
कमाली मंदिर विवाद : मंदिर से मूर्तियां हटाने पर मचा हंगामा, श्रद्धालुओं के दबाव में फिर हुई स्थापना
भोपाल के ऐतिहासिक कमाली मंदिर से प्राचीन मूर्तियां हटाए जाने पर स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रतिमाओं को दोबारा उनके मूल स्थान पर स्थापित किया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की कथित योजना की जांच और मंदिर के जीर्णोद्धार की मांग की।
धर्म
आस्था का केंद्र : दंतेश्वरी मंदिर का अद्भुत इतिहास और महिमा, शक्ति, संस्कृति और परंपरा का संगम
दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आस्था, संस्कृति और इतिहास का प्रमुख केंद्र है। शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहाँ माता सती का दांत गिरने की मान्यता प्रचलित है। 14वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा अन्नमदेव द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला, जनजातीय परंपराओं और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।