"बस्तर की कला" के लिए 5 परिणाम मिले
राज्य सरकार
Chakradhar Samaroh: ओपी चौधरी ने कलाकारों को किया सम्मानित, बस्तर दल को मिला 51 हजार की राशि
Chakradhar Samaroh: अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह के चौथे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी शामिल हुए। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और बस्तर के कलाकारों को 51 हजार रुपए की अतिरिक्त सम्मान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने समारोह को भारतीय कला और संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।
स्टार्टअप
Handmade Products: बस्तर के हस्तशिल्प से शुरू करें स्टार्टअप, कम बजट में बनाएं अपना ब्रांड
Handmade Products:आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हस्तशिल्प कारोबार को आगे बढ़ाने का सबसे आसान और प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप बिजनेस और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है। आकर्षक फोटो, वीडियो, रील्स और उत्पाद बनाने वाले कारीगरों की कहानी को साझा कर ग्राहकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाया जा सकता है।
रायपुर
राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति का सम्मान, प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत बना यादगार पल
राष्ट्रपति भवन में बस्तर से पहुंचे जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आत्मीय स्वागत कर शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट किए। इस दौरान कलाकारों ने बस्तर की लोक संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी, वहीं प्रतिनिधियों ने बदलते बस्तर, शांति और विकास के अनुभव साझा किए।
महासमुंद
बसना में नई पहल : सांसद रूपकुमारी चौधरी ने किया जगदम्बा बस्तर एण्ड रेजिन आर्ट्स का उद्घाटन
बसना में जगदम्बा बस्तर एण्ड रेजिन आर्ट्स का भव्य शुभारंभ सांसद रूपकुमारी चौधरी ने किया। समारोह में कई गणमान्य अतिथियों ने बस्तर की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और स्थानीय कलाकारों को बढ़ावा देने की इस पहल की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र की कला और संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के सम्मान और संस्थान की सफलता की शुभकामनाओं के साथ हुआ।
बस्तर संभाग
बस्तर कला : दुनिया के बाजार में, 1.80 करोड़ की परियोजना , शिल्पकारों को मिलेगा नया मंच
बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए राज्य शासन ने 1.80 करोड़ रुपए की विशेष परियोजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत ढोकरा शिल्प, काष्ठ कला, टेराकोटा, सीसल शिल्प और अन्य पारंपरिक उत्पाद पहली बार अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।