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लियाम डॉसन
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क्रिकेट को झटका : स्टार ऑलराउंडर लियाम डॉसन ने रेड-बॉल क्रिकेट को कहा अलविदा

इंग्लैंड के अनुभवी ऑलराउंडर लियाम डॉसन ने फर्स्ट क्लास यानी रेड-बॉल क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। 36 वर्षीय डॉसन अब व्हाइट-बॉल क्रिकेट पर पूरा ध्यान देंगे और हैम्पशायर काउंटी क्रिकेट क्लब के लिए टी20 और वनडे क्रिकेट खेलते रहेंगे। अपने शानदार फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने 218 मैचों में 10,828 रन बनाए और 380 विकेट हासिल किए। इस दौरान उनके बल्ले से 18 शतक और 56 अर्धशतक निकले। इंग्लैंड के लिए चार टेस्ट मैच खेलने वाले डॉसन ने भारत के खिलाफ डेब्यू टेस्ट में नाबाद 66 रन की यादगार पारी भी खेली थी। डॉसन ने कहा कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन व्हाइट-बॉल क्रिकेट में करियर लंबा करने के लिए यह सही समय है।

कीर्तिमान नेटवर्क
14 May 2026, 11:03 AM
नई दिल्ली
इंग्लैंड क्रिकेट के अनुभवी ऑलराउंडर लियाम डॉसन ने रेड-बॉल क्रिकेट से संन्यास लेकर अपने लंबे और शानदार फर्स्ट क्लास करियर पर विराम लगा दिया है। 36 वर्षीय डॉसन ने बुधवार को इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि अब वह अपने व्हाइट-बॉल करियर पर पूरी तरह फोकस करना चाहते हैं। इंग्लैंड और हैम्पशायर के लिए वर्षों तक शानदार प्रदर्शन करने वाले डॉसन ने क्रिकेट जगत में एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। डॉसन का यह फैसला सिर्फ एक खिलाड़ी के संन्यास की खबर नहीं है, बल्कि इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट के एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसमें संघर्ष, निरंतरता, धैर्य और शानदार प्रदर्शन की कहानी छिपी हुई है। उन्होंने अपने करियर में बल्ले और गेंद दोनों से जो योगदान दिया, वह उन्हें इंग्लिश घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल ऑलराउंडरों में शामिल करता है।

बचपन से ही क्रिकेट के प्रति था जुनून

लियाम डॉसन का जन्म 1 मार्च 1990 को इंग्लैंड के स्विंडन में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनका रुझान था। स्कूल क्रिकेट से लेकर क्लब क्रिकेट तक उन्होंने लगातार अपनी प्रतिभा दिखाई। बाएं हाथ से बल्लेबाजी और बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी करने वाले डॉसन को शुरुआती दिनों से ही एक उपयोगी ऑलराउंडर माना जाता था। कम उम्र में ही उनकी प्रतिभा को पहचान लिया गया और उन्हें इंग्लैंड की जूनियर टीमों में खेलने का मौका मिला। अंडर-19 स्तर पर उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कदम रखा और धीरे-धीरे खुद को इंग्लैंड के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर लिया।

हैम्पशायर के साथ बना गहरा रिश्ता

हैम्पशायर काउंटी क्रिकेट क्लब के साथ डॉसन का रिश्ता बेहद खास रहा। उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय इसी क्लब के लिए खेलते हुए बिताया। हैम्पशायर के लिए खेलते हुए उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और गेंद से भी टीम को अहम सफलताएं दिलाईं। डॉसन उन खिलाड़ियों में शामिल रहे, जो सिर्फ आंकड़ों के लिए नहीं बल्कि टीम की जरूरत के हिसाब से खेलते थे। जब टीम मुश्किल में होती, तब वह जिम्मेदारी उठाकर लंबे समय तक बल्लेबाजी करते। वहीं गेंदबाजी में भी वह कप्तान के सबसे भरोसेमंद विकल्पों में शामिल रहते थे। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी भी परिस्थिति में खुद को ढाल लेते थे। चाहे पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार हो या स्पिनरों के लिए, डॉसन हमेशा प्रभाव छोड़ने में सफल रहे।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बनाया बड़ा रिकॉर्ड

लियाम डॉसन का फर्स्ट क्लास करियर आंकड़ों के लिहाज से बेहद शानदार रहा। उन्होंने कुल 218 फर्स्ट क्लास मुकाबले खेले, जिसमें 34.48 की औसत से 10,828 रन बनाए। एक ऑलराउंडर के तौर पर यह उपलब्धि बेहद खास मानी जाती है। उनके बल्ले से 18 शतक और 56 अर्धशतक निकले। उनका सर्वोच्च स्कोर 171 रन रहा। कई मौकों पर उन्होंने टीम को संकट से बाहर निकालने के लिए धैर्यपूर्ण और जिम्मेदार पारियां खेलीं। सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, गेंदबाजी में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा। उन्होंने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 380 विकेट हासिल किए। उनकी स्पिन गेंदबाजी में सटीकता और नियंत्रण देखने को मिलता था। वह लंबे स्पेल डालने में सक्षम थे और लगातार बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखते थे। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉसन को अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में ज्यादा मौके मिलते, तो वह इंग्लैंड के प्रमुख ऑलराउंडरों में शामिल हो सकते थे।

इंग्लैंड टीम तक पहुंचने का सफर

घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर डॉसन को इंग्लैंड टीम में जगह मिली। उन्होंने इंग्लैंड के लिए चार टेस्ट मैच खेले। हालांकि उनका टेस्ट करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन जितने भी मौके मिले, उनमें उन्होंने खुद को साबित करने की कोशिश की। उनका टेस्ट डेब्यू भारत के खिलाफ हुआ था। इस मैच में उन्होंने नाबाद 66 रन की शानदार पारी खेलकर सभी का ध्यान खींचा। उस समय इंग्लैंड टीम दबाव में थी, लेकिन डॉसन ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए अपनी उपयोगिता साबित की। इसके अलावा उन्होंने वनडे और टी20 क्रिकेट में भी इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी उपयोगिता ज्यादा मानी गई, क्योंकि वह बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन प्रदान करते थे।

टी20 क्रिकेट में बने मैच विनर

आधुनिक क्रिकेट में टी20 प्रारूप का महत्व तेजी से बढ़ा है और डॉसन ने खुद को इस फॉर्मेट में शानदार तरीके से ढाला। उनकी किफायती स्पिन गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी उन्हें टी20 क्रिकेट का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती रही। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के लिए उन्होंने कई अहम टी20 मुकाबले खेले। टी20 लीग्स और घरेलू प्रतियोगिताओं में भी उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा।  रेड-बॉल क्रिकेट से संन्यास लेने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि डॉसन अपने करियर के आखिरी वर्षों में टी20 क्रिकेट में अधिक समय देना चाहते हैं। लगातार तीनों फॉर्मेट खेलना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है और ऐसे में कई खिलाड़ी सीमित ओवरों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

डॉसन का संन्यास धारण 

हैम्पशायर द्वारा जारी बयान में डॉसन ने कहा कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट उनके जीवन का बड़ा हिस्सा रहा है।
डॉसन ने कहा,
“मैंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। यह निर्णय हल्के में नहीं लिया गया। लेकिन मुझे लगता है कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए यह सही समय है।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने हैम्पशायर के लिए 200 से ज्यादा मैच खेले। इन वर्षों में कई शानदार खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिला और कई खूबसूरत यादें बनीं।” डॉसन ने फैंस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका समर्थन हमेशा प्रेरणा देता रहा। उन्होंने यह भी कहा कि हैम्पशायर हमेशा उनका घर रहेगा।

साथियों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने दी शुभकामनाएं डॉसन के संन्यास के बाद क्रिकेट जगत से उन्हें लगातार शुभकामनाएं मिल रही हैं। कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने उनके योगदान की सराहना की है। डॉसन उन खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्हें शायद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतने मौके नहीं मिले, जितनी उनकी प्रतिभा थी। लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका योगदान अमूल्य रहा। हैम्पशायर के प्रशंसकों के बीच भी डॉसन बेहद लोकप्रिय रहे। सोशल मीडिया पर फैंस उनके पुराने प्रदर्शन और यादगार पारियों को साझा करते हुए उन्हें धन्यवाद दे रहे हैं।

बदलते क्रिकेट दौर की तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में क्रिकेट का स्वरूप तेजी से बदला है। टी20 लीग्स की लोकप्रियता और लगातार क्रिकेट के बढ़ते दबाव के कारण कई खिलाड़ी रेड-बॉल क्रिकेट से दूरी बना रहे हैं। लियाम डॉसन का फैसला भी इसी बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। खिलाड़ी अब अपने करियर को लंबा करने और फिटनेस बनाए रखने के लिए सीमित ओवरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि रेड-बॉल क्रिकेट से उनका संन्यास क्रिकेट प्रेमियों के लिए भावुक पल है, लेकिन व्हाइट-बॉल क्रिकेट में उनके अनुभव और कौशल का फायदा अभी भी इंग्लैंड और हैम्पशायर को मिलता रहेगा।

एक शानदार करियर, जो हमेशा याद रहेगा

10 हजार से ज्यादा रन, 380 विकेट, 18 शतक, 56 अर्धशतक और दो दशक के करीब का शानदार करियर लियाम डॉसन ने अपने प्रदर्शन से साबित किया कि वह इंग्लैंड के सबसे भरोसेमंद घरेलू ऑलराउंडरों में से एक रहे हैं। भले ही उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन क्रिकेट मैदान पर उनकी मौजूदगी अभी खत्म नहीं हुई है। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में वह अब भी अपनी टीम के लिए अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। उनका यह सफर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है कि मेहनत, धैर्य और निरंतरता के दम पर लंबे समय तक क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
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