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नियम सख्त : सप्लाई में देरी या लापरवाही पर 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान

छत्तीसगढ़ सरकार ने आबकारी नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए देशी स्पिरिट नियम 1995 को और सख्त बना दिया है। नए नियमों के तहत शराब सप्लाई में देरी या किसी भी तरह की लापरवाही पर अब 1 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 11 Apr 2026, 12:25 PM · अपडेट: 01 Nov 2026, 10:03 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ सरकार ने आबकारी व्यवस्था को और सख्त बनाते हुए छत्तीसगढ़ देशी स्पिरिट नियम 1995 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए प्रावधानों के बाद अब शराब कारोबार और लाइसेंसिंग प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य अवैध शराब गतिविधियों पर रोक लगाना और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।
नए नियमों के अनुसार अगर देशी मदिरा दुकानों तक शराब की आपूर्ति में देरी होती है, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में जुर्माने का प्रावधान अलग-अलग स्तर पर तय किया गया है। छोटे मामलों में 1 हजार से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में यह राशि 50 हजार से बढ़कर 5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
अधिकारियों को नए अधिकार
संशोधित नियमों के तहत आबकारी विभाग के अधिकारियों को पहले से अधिक अधिकार प्रदान किए गए हैं, जिससे वे मौके पर ही कार्रवाई कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि इससे सप्लाई चेन में होने वाली गड़बड़ियों पर तुरंत रोक लगाई जा सकेगी और व्यवस्था में अनुशासन बढ़ेगा।
अधिसूचना जारी
इस संशोधन को लेकर वाणिज्यिक कर एवं आबकारी विभाग के विशेष सचिव देवेंद्र भारद्वाज ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। अधिकारियों के अनुसार नए नियमों के लागू होने के बाद विभागीय कार्रवाई और अधिक प्रभावी तथा तेज हो जाएगी।
राजस्व बढ़ने की उम्मीद
सरकार का अनुमान है कि इन सख्त प्रावधानों से राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही शराब वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आने से अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।
पहले भी हुआ बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि इससे पहले राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत एक और अहम निर्णय लिया था। इसके तहत शराब की बोतलों के लिए कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों के उपयोग पर विचार किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे परिवहन आसान होगा, लागत कम होगी और टूट-फूट की समस्या भी घटेगी।
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