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Pasture created under MGNREGA falls into disrepair.(Image Source: Keertiman Media)
Pasture created under MGNREGA falls into disrepair.(Image Source: Keertiman Media)
दुर्ग संभाग

Chhattisgarh News: मनरेगा से बना चारागाह हुआ बदहाल, लाखों खर्च के बाद भी ननकट्ठी में व्यवस्था बेकार

Chhattisgarh News: ग्राम पंचायत ननकट्ठी में मनरेगा के तहत विकसित किया गया चारागाह परिसर अब देखरेख के अभाव में बदहाल हो गया है। चार एकड़ भूमि पर लाखों रुपए खर्च कर सिंचाई, फेंसिंग, पौधारोपण और सब्जी उत्पादन की व्यवस्था तैयार की गई थी, लेकिन नियमित निगरानी नहीं होने से पौधे सूख गए और कई संसाधन भी गायब बताए जा रहे हैं। कभी महिला स्व सहायता समूहों की आय का जरिया रहा यह परिसर अब अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 19 Sep 2026, 06:19 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 06:12 AM · 2 मिनट पढ़ने का समय
ननकट्ठी
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh News: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत ननकट्ठी में शिवनाथ नदी के समीप करीब चार एकड़ शासकीय भूमि को चारागाह के रूप में विकसित किया गया था। लाखों रुपए खर्च कर भूमि समतलीकरण, फेंसिंग, सिंचाई व्यवस्था, पौधारोपण सहित कई कार्य कराए गए। 
उद्देश्य पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीणों और महिला स्व सहायता समूहों को रोजगार का अवसर देना था। लेकिन वर्तमान में देखरेख के अभाव में यह पूरा परिसर बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है।

सब्जियों से होती थी आमदनी

चारागाह में सिंचाई के लिए दो ट्यूबवेल लगाए गए थे। इनमें एक सौर ऊर्जा और दूसरा विद्युत लाइन से संचालित होता था। महिला स्व सहायता समूहों द्वारा ड्रिप सिंचाई एवं फर्टिगेशन तकनीक से बरबट्टी, भिंडी, बैंगन, टमाटर, लौकी और मिर्च सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन किया जाता था। हरिओम, कात्यायनी और सरस्वती महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए यह परिसर आय का जरिया बना हुआ था। पशुओं के लिए घास और पंचायत स्तर पर पौधारोपण भी किया गया था।

ननकट्ठी का चारागाह बदहाली की राह पर, देखरेख के अभाव में सूख गए 500 से ज्यादा पौधे
500 से अधिक पौधे, अब गिनती के ही बचे

चारागाह परिसर में अमरूद, नींबू, आंवला और करंज सहित 500 से अधिक पौधे लगाए गए थे। इनमें कई पौधे बड़े हो चुके थे और कुछ अमरूद के पौधों में फल भी आने लगे थे। लेकिन नियमित सिंचाई और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से गर्मी के दौरान अधिकांश पौधे सूख गए। कई पौधों को पशुओं ने भी नुकसान पहुंचाया। वर्तमान में कुछ अमरूद और करंज के पौधे ही दिखाई दे रहे हैं।

उपकरण कहां गए, उठ रहे सवाल

सब्जी उत्पादन के लिए लगाए गए ड्रिप और स्प्रिंकलर पाइप, ट्यूबवेल के स्टार्टर-कटआउट तथा सौर ऊर्जा से संबंधित सामग्री सहित अन्य उपकरण वर्तमान में मौके पर उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। इससे लाखों रुपए की लागत से तैयार की गई व्यवस्था के रखरखाव पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन संसाधनों के गायब होने की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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