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भक्ति, दान और धर्ममय आयोजनों से गूंजेगा नवापारा-राजिम
भक्ति, दान और धर्ममय आयोजनों से गूंजेगा नवापारा-राजिम
धर्म

पुरुषोत्तम मास शुरू : भक्ति और पुण्य का पावन महीना शुरू, पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य का बढ़ा महत्व 

नवापारा-राजिम में 17 मई से 15 जून तक चलने वाले पुरुषोत्तम मास को लेकर धार्मिक उत्साह बढ़ गया है। ज्योतिष भूषण पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि सूर्य और चंद्र की गति में अंतर के समायोजन के लिए अधिक मास की व्यवस्था की गई है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने “पुरुषोत्तम मास” नाम दिया। इस दौरान जप, तप, दान और भगवान की भक्ति का फल हजार गुना अधिक मिलने की मान्यता है। नगर और चंपारण धाम में कथा, भजन, झांकियां और विभिन्न धार्मिक आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 18 May 2026, 12:22 PM · अपडेट: 12 Sep 2026, 11:53 AM
राजिम
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

नवापारा-राजिम क्षेत्र में शनिवार 17 मई से प्रारंभ हुए पुरुषोत्तम मास को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों, धर्मस्थलों और वैष्णव समाज में पूरे माह धार्मिक अनुष्ठानों, कथा-प्रवचन, भजन-कीर्तन और विशेष पूजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह माह आध्यात्मिक उन्नति, तप, जप और भगवान की भक्ति के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

ज्योतिष भूषण पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि भगवान सूर्य संपूर्ण ज्योतिष शास्त्र के अधिपति माने जाते हैं और सूर्य तथा चंद्र की गति के आधार पर ही काल गणना की जाती है। दोनों ग्रहों की गति में अंतर आने के कारण लगभग हर तीन वर्ष में अतिरिक्त समय जुड़ जाता है। इसी अंतर के समायोजन के लिए अधिक मास की व्यवस्था बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि लगभग 32 महीने, 16 दिन और 4 घड़ी के अंतर के बाद यह विशेष माह आता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति से अधिक ईश्वर भक्ति और आत्मशुद्धि के लिए समर्पित होता है।

क्यों कहा जाता है इसे पुरुषोत्तम मास

पंडित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने बताया कि अधिक मास को भगवान श्रीकृष्ण ने “पुरुषोत्तम मास” नाम दिया था। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि पहले इस मास को अन्य महीनों की तुलना में उपेक्षित माना जाता था, लेकिन भगवान विष्णु ने इसे अपना स्वरूप देकर विशेष महत्व प्रदान किया। इसी कारण यह महीना भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, व्रत, दान और पूजा का फल हजार गुना अधिक प्राप्त होने की मान्यता है।

हिरण्यकशिपु की कथा से भी जुड़ा है महत्व

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह वर्ष के बारह महीनों में किसी भी समय मृत्यु को प्राप्त न हो। तब भगवान ने अतिरिक्त तेरहवें महीने की व्यवस्था की और नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया। इसी पौराणिक प्रसंग के कारण पुरुषोत्तम मास को दिव्य और चमत्कारी महत्व प्राप्त हुआ। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यह माह भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय होता है। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा। पूरे माह श्रद्धालु प्रातःकाल सूर्योदय से पहले स्नान, देव दर्शन, ध्यान, दान और पूजा-पाठ करेंगे। मंदिरों में भागवत कथा, राम कथा, विष्णु सहस्रनाम पाठ और भजन संध्या जैसे धार्मिक आयोजन होंगे।धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अक्षय फल प्रदान करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।

दान-पुण्य का विशेष महत्व

वर्तमान में जेठ का महीना चल रहा है और इस बार दो जेठ पड़ने के कारण दान-पुण्य का महत्व और बढ़ गया है। इस दौरान श्रद्धालु जल से भरे मटके, गुड़, शक्कर, पंखा, चप्पल, छाता, आम, खरबूजा और जरूरतमंदों के लिए उपयोगी वस्तुओं का दान कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों की सहायता करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

पूरे माह मनाए जाएंगे प्रमुख धार्मिक उत्सव

वैष्णव समाज द्वारा पुरुषोत्तम मास के दौरान सालभर में आने वाले प्रमुख पर्वों को मनोरथ स्वरूप मनाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। इस दौरान रामनवमी, एकादशी, रथयात्रा, श्रावणी तीज, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा, दीपावली, अन्नकूट, बसंत पंचमी और होली जैसे पर्व प्रतीकात्मक रूप से उत्साहपूर्वक मनाए जाएंगे। चंपारण धाम तथा श्री गोवर्धन नाथ जी की हवेली में विशेष झांकियां सजाई जाएंगी और प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। 

नवापारा-राजिम नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों पर भागवत कथा, संगीतमय प्रवचन और सत्संग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु पूरे माह भक्ति और आध्यात्मिक साधना में लीन रहेंगे। धार्मिक आयोजकों के अनुसार पुरुषोत्तम मास केवल पूजा-अर्चना का ही नहीं, बल्कि समाज में सेवा, दया, संयम और सद्भाव का संदेश देने वाला पवित्र अवसर भी है।

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