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गेंदे की आधुनिक खेती
गेंदे की आधुनिक खेती

बड़ा इजाफा : गेंदा खेती ने बदली किसान गितेश्वर टण्डन की तकदीर, धान से दोगुनी हुई आय

महासमुंद विकासखंड के ग्राम फूलवारी (बावनकेरा) के किसान श्री गितेश्वर टण्डन ने पारंपरिक धान खेती छोड़ आधुनिक तकनीकों के साथ गेंदा फूल की खेती अपनाकर सफलता हासिल की। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत 2 एकड़ में गेंदा उत्पादन शुरू कर उन्होंने ड्रिप सिंचाई और यांत्रिकरण का उपयोग किया, जिससे लागत घटी और उत्पादन बढ़ा। अब उन्हें धान की तुलना में दोगुने से अधिक लाभ मिल रहा है और उनकी सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।

कीर्तिमान न्यूज
12 May 2026, 06:21 PM
महासमुंद
कहते हैं कि अगर किसान बदलते समय के साथ नई तकनीक और नई सोच अपनाए, तो खेती केवल जीविका का साधन नहीं बल्कि समृद्धि का मार्ग भी बन सकती है। महासमुंद विकासखंड के ग्राम फूलवारी (बावनकेरा) के प्रगतिशील कृषक श्री गितेश्वर टण्डन ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है।
एक समय था जब टण्डन पारंपरिक धान की खेती करते थे। बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और सीमित लाभ के कारण खेती से अपेक्षित आय नहीं मिल पा रही थी। मेहनत अधिक थी, लेकिन आमदनी सीमित। ऐसे समय में उन्होंने हार मानने के बजाय खेती में नवाचार अपनाने का निर्णय लिया। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार - गेंदा योजना का लाभ लिया। 

आधुनिक तरीके से खेती 

उद्यानिकी विभाग से पौध सामग्री प्राप्त होने के बाद उन्होंने लगभग 2 एकड़ भूमि में आधुनिक तरीके से गेंदा फूल की खेती शुरू की। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने खेती में ड्रिप सिंचाई संयंत्र और यांत्रिकरण तकनीकों का उपयोग किया। इससे पानी की बचत हुई, मजदूरी लागत कम हुई और सिंचाई कार्य सरल एवं प्रभावी बना। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।

गेंदें की खेती से लाभ ज्यादा 

आज गितेश्वर टण्डन लगभग 50 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त कर चुके हैं। उनके फूल महासमुंद और रायपुर की मंडियों तक पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिल रहा है। जहां पहले धान की खेती से लगभग 25 हजार रुपये प्रति एकड़ तक लाभ होता था, वहीं अब गेंदा खेती से उन्हें लगभग 64 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की आय प्राप्त हो रही है।
टण्डन की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह नवाचार, मेहनत और सकारात्मक सोच की प्रेरक कहानी भी है। उन्होंने यह साबित किया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं का सही उपयोग करें, तो खेती को लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। आज उनके गांव और आसपास के क्षेत्र के अनेक किसान भी गेंदा एवं अन्य उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। गितेश्वर टण्डन अब क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जिनकी सफलता की खुशबू दूर-दूर तक फैल रही है।
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