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सुवेंदु का नया फैसला
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सुवेंदु के फैसले : मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य, मीडिया बयानबाजी पर रोक

यह दावा भ्रामक है। इसमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी हैं और उन्होंने मदरसों में “वंदे मातरम” अनिवार्य करने व सरकारी कर्मचारियों पर मीडिया प्रतिबंध जैसे आदेश दिए हैं—लेकिन यह वास्तविकता नहीं है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 21 May 2026, 09:54 AM · अपडेट: 18 Oct 2026, 10:50 AM
कोलकाता
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कई फैसलों को पलटने के बाद, अब सुवेंदु सरकार ने पिछले 24 घंटों के भीतर दो ऐसे बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिसने राज्य से लेकर देश भर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सुवेंदु सरकार का नया फरमान सीधे तौर पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन से जुड़ा हुआ है।

सभी सरकारी और निजी मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य

सुवेंदु सरकार ने तुंरत प्रभाव से आदेश जारी करते हुए पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी और प्राइवेट मदरसों में प्रार्थना के समय 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य कर दिया है।

किन-किन मदरसों पर लागू होगा यह नियम?

प्रदेश के मदरसा शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, यह आदेश राज्य के दायरे में आने वाले हर छोटे-बड़े मदरसे पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं:

  • सरकारी मॉडल मदरसा

  • सरकार द्वारा सहायता प्राप्त (Aided) मदरसा

  • मंजूरशुदा MSKS और SSKS

  • मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) मदरसे

आदेश का प्रभाव: शिक्षा विभाग द्वारा 13 मई की शाम को जारी की गई इस अधिसूचना को खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है। सरकार का रुख साफ है कि इस नियम में किसी भी तरह की ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों की जुबान पर ताला

मदरसों पर कड़े नियम लागू करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को कसने के लिए एक और बड़ा दांव खेला है। नए आदेश के मुताबिक, अब कोई भी सरकारी कर्मचारी या शिक्षक बिना पूर्व अनुमति के मीडिया में किसी भी तरह की बयानबाजी नहीं कर सकेगा।

इस प्रतिबंध के मुख्य बिंदु:

  • मीडिया पर पाबंदी: सरकारी कर्मचारी अब अखबारों, न्यूज चैनलों या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी मर्जी से बयान नहीं दे पाएंगे।

  • लेखन पर भी रोक: बिना विभागीय अनुमति के किसी भी मुद्दे पर लेख लिखने या विचार व्यक्त करने पर भी रोक लगा दी गई है।

  • दायरा: यह आदेश केवल सचिवालय के बाबुओं पर ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी सरकारी स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर भी समान रूप से अनिवार्य होगा।

राष्ट्रीय स्तर पर गरमाई सियासत

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इन दोनों ही फैसलों की देश भर में खूब चर्चा हो रही है। जहां एक तरफ समर्थक इसे 'राष्ट्रवाद' और 'प्रशासनिक अनुशासन' को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला और ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इन फैसलों को लेकर बंगाल की राजनीति में टकराव और बढ़ने के आसार हैं, लेकिन सुवेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि वे राज्य की व्यवस्था को बदलने के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
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