Uttar Pradesh Election: आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। सभी राजनीतिक दल अपने परंपरागत वोट बैंक को बचाए रखने के साथ-साथ उन मतदाताओं को साधने में जुट गए हैं, जो अब तक उनसे दूर रहे हैं। इसी कड़ी में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी चुनावी मैदान में बाजी मारने के लिए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इस बार बीजेपी का मुख्य ध्यान अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अति पिछड़ी जातियों के मतदाताओं को मजबूती से अपने साथ जोड़ने पर है।
अखिलेश यादव के 'PDA' को मात देने की तैयारी
सूबे की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने या मजबूत करने के लिए बीजेपी ने एक बड़ा राजनीतिक खाका तैयार किया है। इस रणनीति का सीधे तौर पर मकसद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चर्चित 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट खोजना है। बीजेपी की नजर गैर-यादव ओबीसी के साथ-साथ अन्य पिछड़ी जातियों तक पहुंच बनाकर उनके बीच अपनी पकड़ और गहरी करने पर है।
प्लान 403: जमीन पर उतरेगी कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज
चुनावी गणित को अपने पक्ष में करने के लिए बीजेपी ने इस पूरे अभियान को ‘प्लान 403’ नाम दिया है। इसके तहत पार्टी प्रदेश स्तर पर लगभग 4 लाख 3 हजार OBC कार्यकर्ताओं की एक विशाल टीम तैयार कर रही है। ये कार्यकर्ता हर एक विधानसभा क्षेत्र में घर-घर जाकर पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। पार्टी नेतृत्व का पूरा जोर बूथ स्तर को मजबूत करने और स्थानीय जातीय समीकरणों को गहराई से समझने पर है। बीजेपी का मानना है कि अगर इन वर्गों का भरोसा जीतने में सफलता मिलती है, तो चुनाव परिणाम काफी हद तक उनके पक्ष में आ सकते हैं। इसके साथ ही, पार्टी सपा के 'परिवारवाद' के मुद्दे को भी जनता के बीच प्रमुखता से उठाने का मन बना चुकी है।
कुर्मी समाज को जोड़ने के लिए पटेल जयंती पर बड़ा आयोजन
पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली समुदायों में पैठ बढ़ाने के लिए बीजेपी लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की वैचारिक विरासत का सहारा ले रही है। आने वाली 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर पार्टी ने प्रदेश के हर बूथ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, राज्य की सभी 403 विधानसभाओं और 1,918 मंडलों में बड़े पैमाने पर सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए विशेष रूप से कुर्मी, पटेल और गंगवार समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश होगी।
बांके बिहारी' के सहारे यादव वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश
बीजेपी की इस नई रणनीति का सबसे दिलचस्प पहलू यादव मतदाताओं तक पहुंच बनाना है, जिन्हें पारंपरिक रूप से सपा का मजबूत आधार माना जाता है। इस वर्ग को जोड़ने के लिए पार्टी ‘अबकी बार बांके बिहारी’ का नया नारा लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है। मथुरा, बांके बिहारी और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सांस्कृतिक व धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से पार्टी यादव समुदाय के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव बनाने का प्रयास कर रही है।







