Uttar Pradesh Politics: तीन नहीं, 403 पर नज़र, अखिलेश यादव के दांव से यूपी की सियासत में हलचल तेज
Uttar Pradesh Politics: राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के बीच अखिलेश यादव ने संकेत दिए हैं कि सपा का फोकस अब तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव और सभी 403 सीटों पर संगठन मजबूत करने पर है।
Uttar Pradesh Politics: राज्यसभा की 10 सीटों के लिए बिछ चुकी बिसात के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान ने राज्य के राजनीतिक पारे को अचानक बढ़ा दिया है।
अखिलेश यादव ने साफ लहजे में कहा है कि पार्टी का पूरा ध्यान अब राज्यसभा की तीन सीटों पर नहीं, बल्कि यूपी विधानसभा की सभी 403 सीटों पर है। अखिलेश के इस रुख के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा ज़ोर पकड़ चुकी है कि सपा अब अपने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का इरादा छोड़ चुकी है।
क्या कहता है सीटों का गणित?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा का एक टिकट पक्का करने के लिए किसी भी दल को कम से कम 37 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की ज़रूरत होती है।
सपा का मौजूदा आंकड़ा: विधानसभा में समाजवादी पार्टी के पास कुल 98 विधायक हैं।
दो सीटों का गणित: दो प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने के बाद पार्टी के पास 24 वोट शेष बचते हैं।
तीसरी सीट की चुनौती: यदि सपा अपना तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारती, तो उसे जीत का आंकड़ा छूने के लिए 13 और विधायकों के समर्थन की दरकार होती।
बीजेपी का दांव और सपा का रुख
इस चुनाव में बीजेपी ने अपने 8 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जबकि
सपा ने दो नामों पर मुहर लगाई थी। शुरुआत में यह कयास लगाए जा रहे थे कि सपा अपने बचे हुए 24 वोटों के दम पर तीसरा दांव चल सकती है। सपा प्रमुख ने भी पहले संकेत दिया था कि यदि विपक्षी दलों और निर्दलियों का साथ मिला, तो पार्टी तीसरे प्रत्याशी पर विचार करेगी। हालांकि, अंदरूनी समीकरणों और क्रॉस वोटिंग की अनिश्चितताओं को देखते हुए अब अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति बदलते हुए सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव (403 सीटों) पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत दे दिया है।
क्या रहे पीछे हटने के मुख्य कारण?
विधायकों की संख्या का अभाव: तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए ज़रूरी 13 अतिरिक्त वोटों की जुगाड़ बैठती नज़र नहीं आ रही थी।
बागी विधायकों का रुख: उम्मीद थी कि एनडीए से असंतुष्ट या पार्टी के बागी विधायकों का साथ मिल सकता है, लेकिन जमीनी समीकरण सपा के पक्ष में नहीं बन सके।
2027 का बड़ा लक्ष्य: राज्यसभा की एक अनिश्चित सीट पर उलझने के बजाय पार्टी अपनी ऊर्जा राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों के संगठन को मजबूत करने में लगाना चाहती है।
ऐसे में अब साफ दिख रहा है कि समाजवादी पार्टी राज्यसभा की सिर्फ दो सीटों पर ही संतोष करेगी और तीसरे उम्मीदवार की दौड़ से बाहर रहकर आगामी विधानसभा चुनावों की ज़मीन तैयार करेगी।