2.68 करोड़ की मरम्मत पहली बारिश में बेअसर, बेल्हारी बांध के तटबंध से बहने लगी मिट्टी, 162 एकड़ फसल पर खतरा
बेल्हारी बांध में 2.68 करोड़ रुपये से मरम्मत के महज तीन महीने बाद तटबंध की मिट्टी बहने और पानी रिसने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों ने काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तकनीकी जांच की मांग की है। तटबंध टूटने की स्थिति में करीब 162 एकड़ फसल प्रभावित होने की आशंका है।
कीर्तिमान डेस्क
13 Aug 2026, 06:44 PM
कवर्धा
बेल्हारी बांध के तटबंध की मरम्मत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपए की लागत से कराया गया मरम्मत कार्य महज तीन महीने बाद ही पहली बारिश में कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। तटबंध के कई हिस्सों से मिट्टी बहने लगी है और जगह-जगह पानी के रिसाव की स्थिति भी सामने आई है। इससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि लगातार बारिश होने और बांध में पानी का दबाव बढ़ने पर तटबंध को और नुकसान पहुंच सकता है। स्थिति को देखते हुए फिलहाल बांध में जमा पानी को नहर के माध्यम से बाहर निकाला जा रहा है, ताकि तटबंध पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।
ग्रामीणों ने लगाया आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य के दौरान तटबंध पर मिट्टी डालने के बाद उसका पर्याप्त तरीके से कंपेक्शन नहीं किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक मिट्टी को निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार मजबूत नहीं किए जाने के कारण बारिश का पानी पड़ते ही कई स्थानों से मिट्टी बहने लगी। पानी के लगातार दबाव के कारण तटबंध के कुछ हिस्सों में रिसाव भी दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद यदि तीन महीने के भीतर ही ऐसी स्थिति बन रही है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच जरूरी है। उनका आरोप है कि काम के दौरान तकनीकी मानकों और गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसका असर अब पहली बारिश में ही सामने आने लगा है।
फसल को नुकसान की आशंका
बेल्हारी बांध के तटबंध की मौजूदा स्थिति ने आसपास खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार बांध के आसपास करीब 162 एकड़ क्षेत्र में फसल लगी हुई है। ऐसे में यदि लगातार बारिश के कारण बांध में पानी बढ़ता है और कमजोर तटबंध दबाव नहीं झेल पाता है तो खेतों में पानी भरने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे खड़ी फसल को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि समय रहते तटबंध के कमजोर हिस्सों को दुरुस्त नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसी कारण ग्रामीण जल्द से जल्द प्रभावित हिस्सों की मरम्मत और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
बेल्हारी बांध से नहर के जरिए निकाला जा रहा पानी।
गुणवत्ता पर उठे सवाल
करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपए खर्च कर तीन महीने पहले ही तटबंध की मरम्मत का काम पूरा किया गया था। इसके बावजूद पहली बारिश में मिट्टी बहने और रिसाव की स्थिति सामने आने के बाद पूरे कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीण ठेकेदार की कार्यप्रणाली के साथ विभागीय निगरानी पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण और मरम्मत का काम तय तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया था तो इतनी जल्दी तटबंध की यह स्थिति कैसे हो गई। ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि मरम्मत के दौरान मिट्टी का पर्याप्त कंपेक्शन किया गया था या नहीं और काम पूरा होने के बाद संबंधित अधिकारियों ने गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की थी।
दबाव कम करने की कोशिश
तटबंध से मिट्टी बहने और रिसाव की स्थिति को देखते हुए फिलहाल बांध में जमा पानी को नहर के माध्यम से बाहर निकाला जा रहा है। इसका उद्देश्य जलस्तर कम कर तटबंध पर पड़ने वाले पानी के दबाव को नियंत्रित करना है। ग्रामीणों का कहना है कि यह फिलहाल राहत का कदम हो सकता है, लेकिन तटबंध की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच जरूरी है। खासकर उन स्थानों की जांच की मांग की जा रही है जहां मिट्टी बह चुकी है या पानी का रिसाव दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि बारिश का दौर जारी रहने की स्थिति में केवल पानी निकालना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कमजोर हिस्सों को समय रहते मजबूत करना भी जरूरी है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मरम्मत कार्य की तकनीकी जांच कराने के साथ ही लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से हुए काम की स्थिति महज तीन महीने में खराब होना गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि तटबंध की मिट्टी बहने की वास्तविक वजह क्या है, कंपेक्शन निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था या नहीं और निर्माण के दौरान विभागीय स्तर पर गुणवत्ता की निगरानी किस तरह की गई थी। अब ग्रामीणों और किसानों की नजर विभाग की अगली कार्रवाई पर है। तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि तटबंध की मौजूदा स्थिति के पीछे निर्माण संबंधी खामी है या कोई अन्य कारण।