रायपुर में करीब आठ साल पहले ऑक्सीजोन परियोजना के चलते हटाए गए 69 दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया अब आगे बढ़ गई है। लंबे समय से व्यवस्थापन की मांग कर रहे इन व्यापारियों को अब शहर के बीचों-बीच नया ठिकाना मिलने की उम्मीद है। रायपुर नगर निगम ने इन दुकानदारों को क्रिस्टल आर्केड के सामने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत दुकानें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम प्रशासन की इस पहल से उन दुकानदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका कारोबार वर्ष 2017 में हुई कार्रवाई के बाद प्रभावित हो गया था। निगम की ओर से अब नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से दुकानों के आवंटन की तैयारी की जा रही है।
महापौर ने सुविधाओं पर दिया जोर
रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऑक्सीजोन से विस्थापित दुकानदारों का व्यवस्थापन सहमति और नियमों के अनुसार जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि दुकानों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी व्यापारी को परेशानी का सामना न करना पड़े। महापौर ने बाजार परिसर को व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि दुकानें आवंटित करने से पहले पूरे क्षेत्र को व्यापार के अनुकूल तैयार किया जाए। इसके लिए चबूतरों की नंबरिंग, बैरिकेडिंग, पेयजल व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई जैसी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाजार को मिलेगा नया स्वरूप
नगर निगम की योजना के अनुसार, पहले क्रिस्टल आर्केड के सामने स्थित बाजार क्षेत्र को व्यवस्थित किया जाएगा। दुकानों की पहचान के लिए नंबरिंग की जाएगी और व्यापारियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि व्यवस्थापन की प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से हो, जिससे भविष्य में किसी तरह की अव्यवस्था की स्थिति न बने। निगम प्रशासन का उद्देश्य है कि दुकानदारों को ऐसा स्थान मिले, जहां वे दोबारा अपना व्यवसाय सुचारू रूप से शुरू कर सकें।आठ साल पुरानी है व्यवस्थापन की मांग
बता दें कि वर्ष 2017 में खालसा स्कूल के सामने सड़क चौड़ीकरण और ऑक्सीजोन परियोजना के लिए नगर निगम ने 69 दुकानों को हटाया था। 26 दिसंबर 2017 को हुई इस कार्रवाई को कुछ ही घंटों में पूरा कर दिया गया था। उस समय प्रभावित दुकानदारों ने आरोप लगाया था कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और वर्षों से चल रहा उनका कारोबार अचानक बंद हो गया। दुकानें हटने के बाद कई व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था।
लंबे समय से कर रहे थे पुनर्वास की मांग
दुकानदारों ने कार्रवाई के बाद लगातार नगर निगम और प्रशासन से व्यवस्थापन की मांग की थी। इस दौरान कई स्थानों पर उन्हें बसाने के प्रस्ताव भी सामने आए, लेकिन शहर से दूर इलाकों में दुकानें लेने को व्यापारी तैयार नहीं हुए। व्यापारियों का कहना था कि दूर जगह मिलने से उनका पुराना ग्राहक आधार प्रभावित होगा और कारोबार दोबारा खड़ा करना मुश्किल होगा। इसके बाद शहर के भीतर ही उपयुक्त स्थान तलाशने की प्रक्रिया शुरू की गई।क्रिस्टल आर्केड के सामने बसाने की तैयारी शुरू
अब नगर निगम ने क्रिस्टल आर्केड के सामने जगह को व्यवस्थापन के लिए चुना है। यहां मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो वर्षों से इंतजार कर रहे 69 दुकानदारों को एक बार फिर अपना व्यवसाय शुरू करने का मौका मिलेगा। नगर निगम की इस पहल को विस्थापित व्यापारियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।