CG Junior Doctor Strike: सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम कर रहे जूनियर डॉक्टर एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। स्टाइपेंड बढ़ाने, वेतन-मानदेय में संशोधन और अन्य लंबित मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।
डॉक्टरों ने ऐलान किया है कि 21 सितंबर से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में OPD सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद भी यदि मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो 23 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। इस आंदोलन में MBBS इंटर्न, PG रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के शामिल होने की बात कही गई है।
सरकार को पहले भी सौंप चुके हैं मांग पत्र
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर वे पहले भी सरकार को कई बार ज्ञापन और पत्र सौंप चुके हैं। इसके बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा आंदोलन का फैसला लेना पड़ा। डॉक्टरों के अनुसार, इससे पहले भी आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से आश्वासन मिला था, लेकिन लंबे समय बाद भी कई मांगों का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
19 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई थी बैठक
जूनियर डॉक्टरों ने बताया कि 19 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड को लेकर बैठक हुई थी। इस दौरान सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने अपना आंदोलन कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था। डॉक्टरों का कहना है कि उस समय 1 सितंबर से बढ़ी हुई स्टाइपेंड राशि देने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी वजह से डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ रही है।17 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध
जूनियर डॉक्टरों की मांगों में MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड में वृद्धि, PG रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन एवं मानदेय में संशोधन शामिल है। इसके अलावा DM और MCh सुपर स्पेशलिटी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बदलाव, वेतन विसंगतियों को दूर करने, बॉन्ड से जुड़े मामलों का समाधान और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों को पूरा करने की मांग की जा रही है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान कराना है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बाद भी सरकारी आदेश जारी नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।


