राजनीति के गलियारों से अक्सर दिलचस्प और हलचल मचा देने वाली खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। हाल ही में चर्चा में आए 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख रामदास अठावले के एनडीए में शामिल होने वाले न्योते को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। दीपके ने सोशल मीडिया के ज़रिए अठावले पर ऐसा करारा तंज कसा है, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। मामला तब शुरू हुआ जब रामदास अठावले ने अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी और एनडीए का हिस्सा बनने का न्यौता दिया।
अठावले के ऑफर पर अभिजीत ने दिया जवाब
अठावले ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की सोच का हवाला देते हुए कहा कि अगर दीपके वाकई बाबा साहेब के दिखाए रास्ते पर चलना चाहते हैं और उनके सपनों को पूरा करना चाहते हैं, तो उन्हें एनडीए का हाथ थाम लेना चाहिए। अठावले के मुताबिक, यही बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का सच्चा तरीका होगा। अठावले के इस ऑफर पर अभिजीत दीपके ने बिल्कुल अपने चिर-परिचित अंदाज़ में जवाब दिया।
इंस्टाग्राम का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए तीखा सवाल दागा:
"महज़ एक महीने पहले तक तो आपके और आपकी सहयोगी पार्टी के लिए मैं 'देश विरोधी' था... फिर अचानक आज यह न्योता कैसे मिलने लगा?"
RSS प्रमुख के बयान का किया समर्थन
दीपके ने अपनी पोस्ट में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को 'देश विरोधी' करार दिया गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदर्शनकारियों की तुलना आतंकियों से की थी और नितिन नवीन ने उन्हें 'वायरस' तक कह दिया था। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दीपके ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का पुरजोर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "देश की नई पीढ़ी (Gen-Z) को यूं ही 'देश विरोधी' कह देना पूरी तरह गलत है।"
टिप्पणी से प्रेरित होकर शुरू की पार्टी
दीपके ने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं को समझा जाना चाहिए। गौरतलब है कि अभिजीत दीपके ने सीजेआई सूर्यकांत की एक टिप्पणी से प्रेरित होकर सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' की शुरुआत की थी। इसके बाद जब नीट (NEET) पेपर लीक का मामला गरमाया, तो उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन काफी चर्चा में रहा, जहाँ प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने भी उनका साथ दिया और भूख हड़ताल की थी।अब क्या मोड़ लेगी राजनीति
इस आंदोलन के बढ़ते दबाव के कारण आखिरकार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था और तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। छात्र राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय सुर्खियों में जगह बनाने वाले अभिजीत दीपके का यह कड़ा रुख यह साफ दिखाता है कि आने वाले दिनों में युवा आंदोलनों और एनडीए के बीच की यह वैचारिक जंग और भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।