बिलासपुर में वन विभाग ने वन्यजीवों की अवैध खरीद-बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जरहाभाठा मंदिर चौक स्थित एक पेट शॉप पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान दुकान से चार इंडियन रूफ्ड टर्टल (कछुए) बरामद किए गए। वन विभाग ने दुकान संचालक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
बताया जा रहा है कि राज्य उड़नदस्ता को सूचना मिली थी कि शहर के एक पेट शॉप में प्रतिबंधित प्रजाति के कछुओं की बिक्री की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए उड़नदस्ता की टीम ने मामले की जांच शुरू की और बिलासपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्रवाई की तैयारी की।
ग्राहक बनकर वन कर्मचारी ने की पुष्टि
वन विभाग की टीम ने सीधे कार्रवाई करने से पहले पूरे मामले की पुष्टि करने की रणनीति बनाई। इसके लिए विभाग के एक कर्मचारी को ग्राहक बनाकर पेट शॉप भेजा गया। कर्मचारी ने दुकान संचालक से संपर्क कर कछुआ खरीदने की इच्छा जताई और तय कीमत पर एक कछुआ खरीदा। कछुए की खरीद-बिक्री की पुष्टि होने के बाद वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई और मौके पर पहुंचकर दुकान में छापेमारी की। जांच के दौरान दुकान से अन्य तीन कछुए भी बरामद किए गए।
दुकान से मिले चार इंडियन रूफ्ड टर्टल
छापेमारी के दौरान बरामद किए गए सभी चारों कछुओं को वन विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों के अनुसार, ये इंडियन रूफ्ड टर्टल प्रजाति के कछुए हैं, जिन्हें रखना और बेचना कानून के तहत प्रतिबंधित है। वन विभाग की टीम ने मौके पर मौजूद दस्तावेजों और अन्य जानकारी की जांच की। इसके बाद दुकान संचालक को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
अनुसूची-1 का संरक्षित वन्यजीव है कछुआ
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इंडियन रूफ्ड टर्टल वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजाति है। ऐसे वन्यजीवों का शिकार करना, पकड़ना, रखना या उनकी खरीद-बिक्री करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून के अनुसार संरक्षित वन्यजीवों की तस्करी या अवैध व्यापार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
न्यायालय ने आरोपी को भेजा जेल
वन विभाग ने आरोपी दुकान संचालक के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि कछुए कहां से लाए गए थे और इस अवैध कारोबार में कोई अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
अवैध वन्यजीव कारोबार पर विभाग की नजर
वन विभाग का कहना है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिबंधित वन्यजीवों की अवैध बिक्री करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग को जहां भी इस तरह की गतिविधियों की जानकारी मिल रही है, वहां जांच कर कार्रवाई की जा रही है।अधिकारियों ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं वन्यजीवों की अवैध बिक्री या तस्करी की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके।