भानुप्रतापपुर स्थित गौतम अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। "घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।" यह कार्रवाई मृतका के पति की शिकायत, उपलब्ध तथ्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। दरअसल, 17 मई को भानुप्रतापपुर निवासी एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए गौतम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, महिला की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल में उसका इलाज जारी रहा, लेकिन कुछ समय बाद महिला और उसके नवजात शिशु दोनों की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।
महिला और नवजात की मौत
घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि समय पर उचित चिकित्सा सुविधा और बेहतर प्रबंधन नहीं मिलने के कारण यह दुखद घटना हुई। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस प्रशासन से शिकायत की थी। मृतका के पति ने इस मामले को लेकर भानुप्रतापपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर गौतम अस्पताल के प्रबंधक डॉ. अनिल गौतम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के दौरान लापरवाही की शिकायतों पर प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को लेकर भी पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। फिलहाल किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में और किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।