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पद्मिनी एकादशी  जानिए पूजा विधि और शुभ उपाय
पद्मिनी एकादशी जानिए पूजा विधि और शुभ उपाय
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 अधिक मास : आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का पर्व है पद्मिनी एकादशी

पद्मिनी एकादशी को भगवान विष्णु और भगवान पुरुषोत्तम को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में आने वाली इस एकादशी पर विधि-विधान से पूजा, उपवास, दीपदान और मंत्र जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक संकट दूर होते हैं।

प्रकाशित: 26 May 2026, 01:21 PM · अपडेट: 11 Sep 2026, 08:56 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। हर महीने आने वाली एकादशी का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है, लेकिन अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी को विशेष रूप से दुर्लभ और अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी भगवान विष्णु, भगवान पुरुषोत्तम और माता लक्ष्मी को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिषाचार्यों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसे में इस महीने पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन उपवास, दान, दीपदान और मंत्र जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही वजह है कि देशभर के विष्णु मंदिरों में आज विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।

पद्मिनी एकादशी

पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में आने वाली एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ एकादशी है। यह एकादशी अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ती है और भगवान विष्णु तथा भगवान पुरुषोत्तम को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और मंत्र जाप करने से पुण्य प्राप्त होता है और जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक ग्रंथों में पद्मिनी एकादशी को मोक्ष देने वाली और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली एकादशी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है तथा आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियां दूर होती हैं।

पद्मिनी एकादशी का पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से मोक्षदायक माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन के पाप नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में भगवान विष्णु स्वयं पृथ्वी पर भक्तों की प्रार्थनाएं सुनते हैं। इसलिए इस दिन की गई पूजा और साधना का फल जल्दी प्राप्त होता है। कई लोग इसे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला पर्व भी मानते हैं।

अधिक मास की एकादशी

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग में जब अतिरिक्त महीना जुड़ता है, तब उसे अधिक मास कहा जाता है। यह महीना पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और उपवास का फल कई गुना बढ़ जाता है। पद्मिनी एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ मानी जाती है जो जीवन में आर्थिक संकट, मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद या करियर से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हों।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा

आज के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा करने का विशेष महत्व है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, फल, पंचामृत और केसर मिश्रित खीर अर्पित करना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि पीले वस्त्र पहनकर पूजा करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। कहा जाता है कि यह मंत्र व्यक्ति के मन को शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

दीपदान का धार्मिक महत्व

पद्मिनी एकादशी पर दीपदान को अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन संध्याकाल में घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। दीपदान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं। खासतौर पर तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है।

विष्णु सहस्रनाम पाठ 

आज के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि विष्णु सहस्रनाम का श्रद्धा के साथ पाठ करने से मानसिक तनाव, भय, आर्थिक संकट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यदि पूरा विष्णु सहस्रनाम पढ़ना संभव न हो तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करना भी शुभ माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह मंत्र व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

मनोकामना पूर्ति 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी पर कुछ विशेष उपाय करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं—
  • तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं
  • भगवान विष्णु को पीले फूल और केसर अर्पित करें
  • गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन दान करें
  • पीली वस्तुओं जैसे हल्दी, चना दाल और वस्त्र का दान करें
  • शाम के समय विष्णु मंत्रों का जाप करें
  • घर में शंख बजाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें
मान्यता है कि इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

पद्मिनी एकादशी व्रत 

पद्मिनी एकादशी के दिन सात्विकता का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा में समय बिताते हैं।धार्मिक नियमों के अनुसार इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है। अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि नियमपूर्वक किया गया यह व्रत व्यक्ति को सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मशुद्धि 

धार्मिक दृष्टि से पद्मिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। आज के दिन पूजा, ध्यान, मंत्र जाप और भक्ति करने से मन को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और व्यक्ति भीतर से मजबूत महसूस करता है। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि अधिक मास में आने वाली यह एकादशी व्यक्ति को न केवल धार्मिक लाभ देती है बल्कि जीवन में अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच भी विकसित करती है।
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