आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट की पहचान करना अब आसान हो सकता है। अभी तक AI से बनी तस्वीरों और वीडियो पर वॉटरमार्क की बात होती थी, लेकिन अब टेक्स्ट कंटेंट की पहचान के लिए भी एक खास तकनीक लाई जा रही है। यह वॉटरमार्क इंसानों को दिखाई नहीं देगा, बल्कि मशीनों की मदद से इसकी पहचान की जा सकेगी। यूरोपीय संघ (European Union) के AI एक्ट के नियमों का पालन करते हुए AI कंपनी Anthropic ने टेक्स्ट वॉटरमार्किंग सिस्टम पर काम शुरू किया है।
यूरोप में 2 अगस्त से AI सर्विस देने वाली कंपनियों के लिए AI से तैयार किए गए कंटेंट को मार्क करना जरूरी किया गया है। इसके बाद कई बड़े AI मॉडल डेवलपर्स ने भी इस नियमों के तहत काम करने की सहमति दी है। भविष्य में Claude मॉडल से तैयार होने वाले टेक्स्ट में ऐसा वॉटरमार्क शामिल होगा, जिससे पता लगाया जा सकेगा कि कंटेंट इंसान ने लिखा है या AI ने तैयार किया है।
टेक्स्ट में दिखाई नहीं देगा वॉटरमार्क
AI वॉटरमार्क सामान्य वॉटरमार्क की तरह नहीं होगा। इसे न तो पढ़ने वाला व्यक्ति देख पाएगा और न ही टेक्स्ट में कोई अतिरिक्त निशान दिखाई देगा।
इस तकनीक की खास बातें-
- AI द्वारा तैयार किए गए कंटेंट की पहचान की जा सकेगी।
- टेक्स्ट की गुणवत्ता और अर्थ में कोई बदलाव नहीं आएगा।
- इसमें छिपे हुए कैरेक्टर या अलग से कोई शब्द नहीं जोड़े जाएंगे।
- इसे लागू करने में ज्यादा अतिरिक्त लागत नहीं आएगी।
- वॉटरमार्क में किसी व्यक्ति या संस्था की पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल नहीं होगी।
इस तरह काम करेगा AI टेक्स्ट वॉटरमार्क
Claude जैसे लैंग्वेज मॉडल किसी जवाब को तैयार करते समय एक-एक शब्द का चयन करते हैं। अगले शब्द को चुनने के लिए मॉडल कई संभावित शब्दों में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनता है। वॉटरमार्किंग सिस्टम इसी प्रक्रिया में एक खास पैटर्न तैयार करेगा। यह पैटर्न आम पाठकों को दिखाई नहीं देगा, लेकिन विशेष डिकोडिंग तकनीक की मदद से इसकी पहचान की जा सकेगी। इस प्रक्रिया में शब्दों का चयन सामान्य तरीके से ही होगा, लेकिन रैंडम शब्द चयन के लिए इस्तेमाल होने वाले तरीके में बदलाव किया जाएगा। इससे AI द्वारा बनाए गए टेक्स्ट की पहचान संभव होगी।AI कंटेंट की गुणवत्ता पर नहीं पड़ेगा असर
Anthropic के अनुसार, इस वॉटरमार्किंग तकनीक से Claude के जवाबों की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी। वॉटरमार्क वाले और बिना वॉटरमार्क वाले टेक्स्ट में पढ़ने वालों को कोई अंतर महसूस नहीं होगा। AI वॉटरमार्क डिजिटल दस्तावेजों या बैंक नोटों पर मौजूद सामान्य वॉटरमार्क से अलग होगा। इसे खुली आंखों से नहीं देखा जा सकेगा, बल्कि विशेष तकनीक की मदद से ही इसकी पहचान होगी। AI के बढ़ते उपयोग के साथ यह पता लगाना चुनौती बन गया है कि कौन-सा कंटेंट मानव द्वारा लिखा गया है और कौन-सा मशीन द्वारा तैयार किया गया है। ऐसे में AI वॉटरमार्किंग तकनीक डिजिटल दुनिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।