फास्ट-ट्रैक कोर्ट से हो सख्त कार्रवाई
नए विधेयक की 5 सबसे बड़ी और अहम बातें
10 साल तक की जेल का प्रावधान
अब तक नकल या पेपर लीक कराने वाले माफियाओं को अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान था। लेकिन नए विधेयक में इसे बढ़ाकर 10 साल की कठोर जेल कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि संगठित अपराध से निपटने के लिए सजा भी उतनी ही कठोर होनी चाहिए।
10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना
आर्थिक रूप से भी आरोपियों को सबक सिखाने की तैयारी है। नए प्रावधानों के तहत अब 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, अगर पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ती है और उसे दोबारा कराने में जो भी आर्थिक खर्च आएगा, उसकी भरपाई भी दोषियों की संपत्ति या उनसे ही की जाएगी।
AI, हैकिंग और साइबर धांधली पर भी शिकंजा
समय के साथ नकल के तरीके भी आधुनिक हो चुके हैं। इसीलिए इस कानून में केवल कागजी प्रश्नपत्र लीक होना ही शामिल नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकल करना, कंप्यूटर सिस्टम या सर्वर हैक करना, ऑनलाइन पेपर लीक करना और साइबर धोखाधड़ी को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
परीक्षा एजेंसियों और अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही
अक्सर देखा गया है कि गड़बड़ी के मामलों में छोटी मछलियों पर कार्रवाई हो जाती है और मुख्य तंत्र बच निकलता है। नए बिल के तहत परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियां, सर्विस प्रोवाइडर, आईटी कंपनियां या संलिप्त अधिकारी भी सीधे जिम्मेदार होंगे। लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर उनके खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा चलेगा।
मुकदमों की तेज सुनवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट
पेपर लीक से जुड़े मामले सालों-साल न लटके रहें, इसके लिए जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल बढ़ाने और फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से मामलों की त्वरित सुनवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जा सके।