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पेपर लीक रोकने के लिए संसद में पेश नया संशोधन विधेयक
पेपर लीक रोकने के लिए संसद में पेश नया संशोधन विधेयक
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संशोधन विधेयक : पेपर लीक के दोषियों की अब खैर नहीं, 10 साल जेल का प्रावधान

केंद्र सरकार ने सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए लोकसभा में नया संशोधन विधेयक पेश किया है। इसमें दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ तक जुर्माना, AI और साइबर धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई तथा फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रावधान किया गया है।

कीर्तिमान न्यूज
27 Jul 2026, 02:49 PM
नई दिल्ली
देशभर में सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक व नकल की घटनाओं से परेशान युवाओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने इस पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए कमर कस ली है। लोकसभा में 'द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया गया है। इस संशोधन विधेयक का सीधा मकसद उन संगठित गिरोहों, हैकर्स और धांधली करने वालों की कमर तोड़ना है, जो लाखों छात्रों की सालों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। सरकार ने साफ किया है कि अब इस तरह के अपराधों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। 

फास्ट-ट्रैक कोर्ट से हो सख्त कार्रवाई 

बीते कुछ समय में नीट, नेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जिस तरह से विवाद खड़े हुए और देशभर में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया, उसने व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए थे। ईमानदार और दिन-रात पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही सरकार यह कड़ा कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस बात पर जोर दे चुके हैं कि पेपर लीक के मामलों में त्वरित जांच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में तकनीकी सुधार और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नंदन नीलेकणी की अगुआई में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है।

नए विधेयक की 5 सबसे बड़ी और अहम बातें

10 साल तक की जेल का प्रावधान

अब तक नकल या पेपर लीक कराने वाले माफियाओं को अधिकतम 5 साल की सजा का प्रावधान था। लेकिन नए विधेयक में इसे बढ़ाकर 10 साल की कठोर जेल कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि संगठित अपराध से निपटने के लिए सजा भी उतनी ही कठोर होनी चाहिए।

10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना

आर्थिक रूप से भी आरोपियों को सबक सिखाने की तैयारी है। नए प्रावधानों के तहत अब 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, अगर पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ती है और उसे दोबारा कराने में जो भी आर्थिक खर्च आएगा, उसकी भरपाई भी दोषियों की संपत्ति या उनसे ही की जाएगी।

AI, हैकिंग और साइबर धांधली पर भी शिकंजा

समय के साथ नकल के तरीके भी आधुनिक हो चुके हैं। इसीलिए इस कानून में केवल कागजी प्रश्नपत्र लीक होना ही शामिल नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकल करना, कंप्यूटर सिस्टम या सर्वर हैक करना, ऑनलाइन पेपर लीक करना और साइबर धोखाधड़ी को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

परीक्षा एजेंसियों और अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही

अक्सर देखा गया है कि गड़बड़ी के मामलों में छोटी मछलियों पर कार्रवाई हो जाती है और मुख्य तंत्र बच निकलता है। नए बिल के तहत परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियां, सर्विस प्रोवाइडर, आईटी कंपनियां या संलिप्त अधिकारी भी सीधे जिम्मेदार होंगे। लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर उनके खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा चलेगा।

मुकदमों की तेज सुनवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट

पेपर लीक से जुड़े मामले सालों-साल न लटके रहें, इसके लिए जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल बढ़ाने और फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से मामलों की त्वरित सुनवाई का प्रावधान किया गया है, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जा सके।

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