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कॉकरोच जनता पार्टी सुर्खियों में
कॉकरोच जनता पार्टी सुर्खियों में
राजनीति

नियुक्ति पर घमासान : प्रियंका चतुर्वेदी ने 100% पुरुष टीम पर कसा तंज, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ अपनी नई टीम की घोषणा के बाद विवादों में घिर गई है। पार्टी ने तीन पुरुष प्रवक्ताओं की नियुक्ति की, जिसके बाद महिला प्रतिनिधित्व न होने पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर तंज कसते हुए इसे “100% पुरुष प्रतिनिधित्व” बताया।

कीर्तिमान न्यूज
04 Jun 2026, 11:33 AM
नई दिल्ली

देश की राजनीति में अपनी अनूठी शुरुआत को लेकर चर्चा बटोरने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) एक बार फिर सुर्खियों में है। शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं के खिलाफ एक बड़े प्रस्तावित आंदोलन की तैयारी कर रही इस नई पार्टी ने मंगलवार को अपने तीन मुख्य प्रवक्ताओं के नामों की घोषणा की थी। लेकिन इस घोषणा के बाद से ही पार्टी के भीतर और बाहर सियासी घमासान शुरू हो गया है। विवाद की मुख्य वजह पार्टी में महिलाओं को प्रतिनिधित्व न मिलना है, जिस पर अब विपक्ष के बड़े चेहरों ने भी उंगली उठानी शुरू कर दी है।

नए प्रवक्ताओं की एंट्री और संस्थापक की भारत वापसी

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के 6 जून को भारत लौटने के कार्यक्रम से ठीक पहले संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए अपनी नई टीम का परिचय कराया:

  • मुख्य प्रवक्ता: खोजी पत्रकार सौरव दास को पार्टी का मुख्य चेहरा बनाया गया है।

  • मीडिया और जन प्रतिनिधित्व: राजनीतिक शोधकर्ता व फिल्म निर्माता विजेता दहिया और पूर्व प्रबंधन सलाहकार आशुतोष रांका को मीडिया के सामने संगठन का पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी ने दावा किया है कि “CJP भारत के राजनीतिक विमर्श की दिशा बदलने के लिए प्रतिबद्ध है और इस बदलाव का नेतृत्व नई पीढ़ी के नेता करेंगे।”

"100% पुरुष प्रतिनिधित्व"

इस घोषणा के सामने आते ही पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पार्टी की लैंगिक रूढ़िवादिता (Gender Bias) पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने 'एक्स' पर तंज कसते हुए लिखा:

"तो कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत संस्थापक, सह-संस्थापक और प्रवक्ता के रूप में 100 प्रतिशत पुरुष प्रतिनिधित्व के साथ हुई है। ठीक है, अब और जानने के लिए उत्सुक हूं।"

प्रियंका चतुर्वेदी के इस बयान ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। नेटिजन्स अब सवाल उठा रहे हैं कि जो पार्टी देश की व्यवस्था और विमर्श को बदलने का दावा कर रही है, उसने अपनी शुरुआती कोर टीम में एक भी महिला को जगह क्यों नहीं दी।

ताज़ा अपडेट और राजनीतिक मायने

मुख्य बिंदुविवरण
विवाद का कारणनई टीम में महिला प्रवक्ताओं की शून्य भागीदारी।
पार्टी का अगला कदमशिक्षा व्यवस्था की विफलताओं के खिलाफ एक बड़ा जमीनी प्रदर्शन।
आगामी घटनाक्रम6 जून को संस्थापक अभिजीत दीपके की भारत वापसी के बाद पार्टी इस विवाद पर अपना रुख साफ कर सकती है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक पुरानी टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई यह पार्टी खुद को युवाओं और नई सोच के विकल्प के रूप में पेश कर रही है। लेकिन अपनी पहली ही बड़ी सांगठनिक घोषणा में 'महिला प्रतिनिधित्व' की अनदेखी करने पर पार्टी बैकफुट पर नजर आ रही है। अब देखना यह होगा कि 6 जून को भारत लौट रहे पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके इस विवाद को शांत करने के लिए क्या अपनी टीम में किसी महिला चेहरे को शामिल करते हैं या नहीं।
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