एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल से पहले विनेश फोगाट लगातार चर्चा में थीं। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) और चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद के बाद उन्हें ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए कानूनी लड़ाई तक लड़नी पड़ी। पहले उनके ट्रायल खेलने पर रोक जैसी स्थिति बन गई थी, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। अंततः सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति मिली। इसी वजह से यह मुकाबला केवल एक चयन ट्रायल नहीं, बल्कि भारतीय कुश्ती जगत की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन गया था।
ज्योति के खिलाफ नहीं चला अनुभव
नई दिल्ली के के.डी. जाधव इंडोर हॉल में आयोजित ट्रायल में विनेश फोगाट का सामना हरियाणा की युवा पहलवान ज्योति से हुआ। मुकाबले से पहले विनेश को अनुभवी खिलाड़ी होने के कारण मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैट पर ज्योति ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ विनेश का एशियन गेम्स टीम में सीधे चयन का सपना टूट गया। वहीं ज्योति ने शानदार जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी मजबूत कर ली।
भावुक हुईं विनेश
मुकाबले के बाद विनेश फोगाट ने भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में उन्हें केवल खेल पर नहीं, बल्कि कई अन्य चुनौतियों पर भी ध्यान देना पड़ा। उन्होंने कहा, "मैं केवल मैट पर नहीं लड़ी, बल्कि पूरे सिस्टम से लड़ी हूं। यह सफर आसान नहीं था। फिर भी मैं हार नहीं मानूंगी और मजबूत वापसी करूंगी।" उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने उनके संघर्ष और हौसले की सराहना की।
विवादों से घिरा रहा सफर
पिछले कुछ वर्षों में विनेश फोगाट भारतीय कुश्ती से जुड़े कई विवादों का केंद्र रही हैं। महिला पहलवानों के आंदोलन में उनकी प्रमुख भूमिका रही। इसके बाद चयन प्रक्रिया, वजन वर्ग और ट्रायल को लेकर भी लगातार बहस होती रही। पेरिस ओलंपिक के दौरान वजन संबंधी विवाद के बाद उनका करियर एक बार फिर चर्चा में आया था। ऐसे में एशियन गेम्स ट्रायल को उनकी वापसी के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा था।
सफल पहलवान
हार के बावजूद विनेश फोगाट का रिकॉर्ड भारतीय कुश्ती इतिहास में बेहद शानदार माना जाता है। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। विनेश एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवानों में शामिल हैं। उनकी उपलब्धियों ने भारतीय महिला कुश्ती को नई पहचान दिलाई है। यह हार विनेश फोगाट के करियर का अंत नहीं है। 31 वर्षीय पहलवान के पास अभी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में वापसी का अवसर मौजूद है। खुद विनेश ने भी संकेत दिए हैं कि वह संघर्ष जारी रखेंगी और जल्द ही मैट पर फिर लौटेंगी। अब खेल प्रेमियों की नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय कुश्ती की यह स्टार खिलाड़ी अगली चुनौती के लिए खुद को किस तरह तैयार करती हैं।
