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हाईवे जमीन अधिग्रहण घोटाले में ED की कार्रवाई
हाईवे जमीन अधिग्रहण घोटाले में ED की कार्रवाई
रायपुर Featured

बड़ा फर्जीवाड़ा : 56 लाख की जगह बंटे 9 करोड़, ED ने कुर्क की 12 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति

रायपुर-विशाखापट्टनम नेशनल हाईवे जमीन अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.78 करोड़ रुपये की 62 संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। मामले में जय प्रकाश गांधी समेत 14 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच में जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये का अवैध मुआवजा लेने का मामला सामने आया है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 03 Aug 2026, 08:11 AM · अपडेट: 31 Oct 2026, 11:30 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
रायपुर-विशाखापट्टनम नेशनल हाईवे के लिए भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत हुए जमीन अधिग्रहण में एक बड़े 'खेल' का पर्दाफाश हुआ है। इस बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.78 करोड़ रुपये की 62 चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) कर लिया है। इसके साथ ही जय प्रकाश गांधी समेत 14 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है। यह पूरा घोटाला अधिकारियों, भू-माफियाओं और दलालों के गहरे गठजोड़ का नतीजा है। 

मिलीभगत से बना डाले कई नए खसरे

ईडी की जांच में सामने आया कि जैसे ही जमीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी हुआ, इन लोगों ने रातों-रात जमीनों की बंदरबांट शुरू कर दी। परिवार के सदस्यों और करीबियों के नाम पर बिक्री और 'गिफ्ट डीड' के जरिए एक ही जमीन को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया। राजस्व विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अभनपुर के नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से 159 नए खसरे बना डाले और रिकॉर्ड में 80 नए नाम जोड़ दिए। नतीजा यह हुआ कि महज 559 मीटर जमीन, जिसका असली मुआवजा करीब 29.5 करोड़ बनता था, उसकी कीमत कागजों में बढ़ाकर 70 करोड़ के पार पहुंचा दी गई। इस मामले में जय प्रकाश गांधी नाम के आरोपी का केस सबसे चौंकाने वाला है। 

मुआवजा में मिला 9.83 करोड़

नियम के मुताबिक, गांधी और उनके परिवार को सिर्फ 56.76 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन उन्हें 9.83 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान कर दिया गया। इस तरह करीब 9.27 करोड़ रुपये की काली कमाई की गई। इस अवैध रकम को छिपाने के लिए प्रॉपर्टी, शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला उगेतरा गांव की उमा तिवारी का सामने आया। 

गांधी परिवार के यहां जांच
फर्जी कागजात से करोड़ का मुआवजा 

आरोप है कि उसने खुद को एक मृत किसान की गोद ली हुई बेटी बताकर फर्जी कागजात बनाए और 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा डकार लिया। इस घोटाले की जड़ें 23 अप्रैल 2025 तक जाती हैं, जब छत्तीसगढ़ ACB और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) और सक्षम भूमि अधिग्रहण अधिकारी (CALA) निरभय साहू समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। 

करोड़ों की संपत्ति की गई कुर्क 

मुख्य आरोपियों में से एक जय प्रकाश गांधी को ईडी 3 जून 2026 को ही गिरफ्तार कर चुकी है। इससे पहले दिसंबर 2025 और अप्रैल 2026 में हुई छापेमारी के दौरान 49 लाख कैश और करीब 89.80 लाख रुपये कीमत की 37 किलो से ज्यादा (37,133 ग्राम) चांदी बरामद हुई थी। रायपुर जोनल ऑफिस की ओर से 31 जुलाई 2026 को जारी नए आदेश (क्रमांक-17/2026) के तहत जो 12.78 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है, उसमें 4.69 करोड़ के शेयर और म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं। 

36.14 करोड़ की हो चुकी जब्त 

अगर अब तक की पूरी कार्रवाई और भूमि दलाल गिरोह की पहले कुर्क हो चुकी 23.35 करोड़ की संपत्तियों को मिला लें, तो ईडी इस मामले में अब तक कुल 36.14 करोड़ रुपये की जब्ती कर चुकी है। अकेले अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर की सड़क के लिए 324 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा तय हुआ था, जिसमें से 246 करोड़ बांटे जा चुके हैं और भंडाफोड़ होने के बाद बाकी 78 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया गया है। जांच एजेंसी के तेवर बताते हैं कि कार्रवाई अभी थमी नहीं है और आने वाले दिनों में इस घोटाले में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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